खोंच के दोहा
– मिर्जा खोंच आपन बड़ाई हर घरी, हरदम बड़का बोल तब जाके ए दुनिया में लागी तोहर मोल. रातो दिन पढ़ते रहल, बाकिर भइल ना पास भइल पैरवी तब जाके, जागल ओकर भाग. लुट के इहवाँ छुट बा, लूट सके त लूट तब जाके भगवन के, मार तनी सैलूट....
Read More– मिर्जा खोंच आपन बड़ाई हर घरी, हरदम बड़का बोल तब जाके ए दुनिया में लागी तोहर मोल. रातो दिन पढ़ते रहल, बाकिर भइल ना पास भइल पैरवी तब जाके, जागल ओकर भाग. लुट के इहवाँ छुट बा, लूट सके त लूट तब जाके भगवन के, मार तनी सैलूट....
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) उपन्यास का बारे में...
Read More– डॉ. गोरख मस्ताना सहर भइल सुरसा निगल रहल गाँव के चिमनी चबाये लागल निमिया के छाँव के नगर नगर नेहिया के दियरी टेमाइल नफ़रत के रोग गाँव गाँव में समाइल गाँवो में भईयारी बाँच गइल नाँव के सहर भइल सुरसा निगल रहल गाँव के. गँऊआ के...
Read More१६ जनवरी के सिवान के पत्रकार भवन में भोजपुरी अकादमी के प्रादेशिक भोजपुरी कवि सम्मलेन के शानदार आयोजन भइल. ” भोजपुरी में हर तरह के अभिव्यक्ति के क्षमता बा. एकर लेखक बिना कवनो सहायता आ संरक्षण के स्तरीय साहित्य के सृजन कर...
Read Moreभोजपुरी जनमानस के वेदना उभारत एगो उपन्यास अँजोरिया भोजपुरी के बढ़न्ती आ विकास खातिर हमेशा से प्रतिबद्ध रहल बिया आ एह खातिर ओकर हमेशा से कोशिश रहल बा कि भोजपुरी में प्रतिष्ठित रचना दिहल जाव. अँजोरिया के गर्व बा कि जतना प्रतिनिधि...
Read More