लोक कवि अब गाते नहीं (२)
(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) पहिलका कड़ी से आगे….....
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Read More– नूरैन अंसारी जब आपन-आपन लोगवा चिन्हाये लागेला. तब स्वर्ग जइसन घरवो बटाये लागेला. जब अबर हो जाला बिश्वास के बरही, तब तिसरइत के हेंगा टंगाये लागेला. लोग भुला जाला जब नेकी के नक्सा, गुलाबो धतूर जइसन बसाये लागेला. जब घर में...
Read Moreअतवार २३ जनवरी के बक्सर में आयोजित भोजपुरी संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में बिहार के पूर्व मंत्री श्री अवधेश नारायण सिंह जी के द्वारा “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” के चऊथा चरण के उदघाटन करल गईल. उहाँ के एह कार्यक्रम के महत्ता...
Read More– मिर्जा खोंच आपन बड़ाई हर घरी, हरदम बड़का बोल तब जाके ए दुनिया में लागी तोहर मोल. रातो दिन पढ़ते रहल, बाकिर भइल ना पास भइल पैरवी तब जाके, जागल ओकर भाग. लुट के इहवाँ छुट बा, लूट सके त लूट तब जाके भगवन के, मार तनी सैलूट....
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) उपन्यास का बारे में...
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