लोक कवि अब गाते नहीं – ४
(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) तिसरका कड़ी से आगे….. आ...
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Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी आईल बाटे फिर से बाबा शिवरात्रि के त्यौहार, भोले बाबा सुनी लिह बिनती हमार, मत दीह केहु के भी कवनो उपहार, भोले बाबा, भोले बाबा, भोले बाबा हमार II पापियन के नाश के महिमा सुनाईले, भस्मासुर के लीला भी भूले...
Read More– ओ.पी .अमृतांशु जा रे झूम के बसंती बहार पिया के मती मार पिया बसेला मोर परदेसवा में . सरसों के फुलवा फुलाईल आमवा के दाढ़ मोजराईल , अंगे-अंगे मोर गदाराइल हाय!उनुका ना मन में समाईल , लाली होठवा भइल टहकार पिया के मती मार...
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