छठ गीत
– ओ.पी. अमृतांशु अँखिया से बही गइले, लोरवा के नदिया, छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम. गोबरे लिपवलीं, पुरवलीं चउकावा, जगमग-जगमग, जरेला दियनवा, कोसिया भरवलीं, कईलीं घीउए हुमदीया. छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो...
Read More– नूरैन अंसारी अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब. कलिख अपना मन के ओकरा रौनक से मिटाएब. कुछ ना मिलल नफरत कर के, हो गइनी अकेला. लोर भरल अंखिया से देखनी, हम दुनिया के मेला. छलकत अंखिया के गगरी के, हँसी से सजाएब. अबकी बार...
Read Moreओह दिन एगो टीवी चैनल पर संगीत के रियलिटी शो देखत रहीं. एगो गायिका गीत गावत रही, “सईंया के थूरल देहिया….” मतलब उनकर रहे “सईंया से थुराइल देहि” के आ गावत रहली “सईंया के थूरल देहिया..”. कुछ...
Read Moreएगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....
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