श्रेणी: साहित्य

छठ गीत

– ओ.पी. अमृतांशु अँखिया से बही गइले, लोरवा के नदिया, छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम. गोबरे लिपवलीं, पुरवलीं चउकावा, जगमग-जगमग, जरेला दियनवा, कोसिया भरवलीं, कईलीं घीउए हुमदीया. छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो...

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जरी दिया तोहरा याद में..

– नूरैन अंसारी अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब. कलिख अपना मन के ओकरा रौनक से मिटाएब. कुछ ना मिलल नफरत कर के, हो गइनी अकेला. लोर भरल अंखिया से देखनी, हम दुनिया के मेला. छलकत अंखिया के गगरी के, हँसी से सजाएब. अबकी बार...

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डर-भय

– डॉ. कमल किशोर सिंह डर बहुरुपिया बनि के आवे, हरदम दिल दुआरी पे. कइसे जान बचाईं आपन, कतना चलीं होशियारी से? चिकन चेहरा से हम डरीं की बढ़ल केश मूँछ दाढ़ी से? भय भगवान से केकरा नइखे, काहे ज्यादा भय पुजारी से ? पढ़ल लिखल लोगन...

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बतकुच्चन – ४

ओह दिन एगो टीवी चैनल पर संगीत के रियलिटी शो देखत रहीं. एगो गायिका गीत गावत रही, “सईंया के थूरल देहिया….” मतलब उनकर रहे “सईंया से थुराइल देहि” के आ गावत रहली “सईंया के थूरल देहिया..”. कुछ...

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बतकुच्चन – ३

एगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....

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