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– ओ.पी. अमृतांशु


अँखिया से बही गइले, लोरवा के नदिया,
छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम.

गोबरे लिपवलीं, पुरवलीं चउकावा,
जगमग-जगमग, जरेला दियनवा,
कोसिया भरवलीं, कईलीं घीउए हुमदीया.
छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम.

जोड़े नरियरवा, निबुआ अनरवा,
चननी चढवले बानी, लाले-लाले रंगवा.
अंचरा बिछ्वले बानी, भरीं दिहीं गोदिया.
छठी माई, सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम.

भूखल बा दुखल देहिया, गरवा पियासल.
लागल बा नेहिया, सनेहिया बा मातल.
हहरल बा, हियरा के हरि लीं विपतिया.
छठी माई, सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम.

कोठा-अटारी दिहलीं, सुनर सजनवा.
एके बालकवा बिनु सुन बा भवनवा.
बाँझिन पुकारे सासु, ननदी जेठनिया !
छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम.

1 Comment

  1. SAHIL

    छठ बधाई हो ओ.पी.जी! छठ मैय्या तोहार हर मनो कामना पूरी करें ! बहुत सुन्दर गीत लिखे हो

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