श्रेणी: साहित्य

कहाँ जात बा संसार

– नूरैन अंसारी आजकल काहे लोगवा खुद से नाराज लागत बा. बड़ा बदलल-बदलल सबकर मिजाज लागत बा. लोग मवुरा के बिगड़ले बा मुहवा के रौनक, बुझाता हंसला पर कौनो बेयाज लागत बा. अपने घर में लोगवा काटत बा बनवास, गरज के मारल इ पूरा समाज...

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डा॰ सुभाष राय के यूनीकवि सम्मान

हिंदयुग्म की ओर से डा सुभाष राय के अगस्त महीना क सर्वश्रेष्ठ कवि घोषित कइल गइल बा. हिंदयुग्म हर महीना एगो यूनीकवि प्रतियोगिता क आयोजन करेला, जवने में देश भर से प्रविष्टि मंगावल जाले. उनहन के अलग-अलग जजन के पैनल के सऊंप दिहल...

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जिंदगी के ग़ज़ल

– मनोज भावुक हजारो सपना सजा के मन में चलत रहेलें मनोज भावुक गिरत रहेलें, उठत रहेलें, बढ़त रहेलें मनोज भावुक एह जिंदगी के सफर में उनका तरह-तरह के मिलल तजुर्बा ओमे से कुछ के ग़ज़ल बना के कहत रहेलें मनोज भावुक ऊ जौन भोगलें, ऊ...

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गाई गाई लोरिया

– ओ.पी. अमृतांशु गाई गाई लोरिया निंदरिया बोलावेली अँगनवा में दादी चान के बोलावेली अँगनवा में. आरे आवऽ बारे आवऽ, नदिया किनारे आवऽ सोने के कटोरवा में दुध भात लेले आवऽ दूध भात मुँहवा में घुट से घुटावेली अँगनवा में दादी चान के...

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आजादी त मिलल, पर केकरा के

– अभयकृष्ण त्रिपाठी आजादी त मिलल, पर केकरा के, ई सवाल बा. कइसे कहीं दिल के दरदिया, कहला में बवाल बा. हर केहू देखा रहल बा, सबके आपन-आपन खेला, अपना मतलब के लगा रहल बा आजादी के मेला, का नेता का परेता आ का गुरु अउरी का चेला....

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