बतकुच्चन – ३
एगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....
Read Moreएगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....
Read Moreघात मीत के, बात प्रीत के, खेल कहानी हार जीत के, सबका के बतलाईं कइसे? गीत नया हम गाईं कइसे? दोसरा के का बाति चलाईं अनकर के का दोष देखाईं अपने हार सुनाईं कइसे ? गीत नया हम गाईं कइसे ? अपने चिन्ता, अपने फिकिरे कोल्हू के सभ बैल बनल...
Read More– ओ.पी. अमृतांशु नीमिया भइली कचनार, महारानी रउरी अँगना में ! लहसेला दावाना-मडुयावा, फुलाइल बेला फुलवा नू हो, ए मईया, गमकेला ओढ़ऊल हार महारानी रउरी अँगना में ! चम-चम चमकेला मुखड़ा, कि लाखो चंदा टूकड़ा नू हो, ए मईया, दमके...
Read More– मनिर आलम सब ख़ुशी बा लोग के दामन में. बाकिर हंसी खातिर समय नइखे. दिन रात घूमत दुनिया में. जिनिगी खातिर समय नइखे. महतारी के लोरी के एहसान सब के बा. बस महतारी कहे खातिर समय नइखे. सब नाता रिश्ता त मर चुकल बा. अब ओके दफनावे...
Read More– ओ.पी. अमृतांशु कईसे सहबू महँगिया के मार करीमन बहू राम के भजऽ. खरची ना जुटेला भोजनवा, देलू पाँच गो रे बेटी के जनमवा, आइल छठवा गरभवा कपार करीमन बहू राम के भजऽ. डहकेली छछनेली बेटिया, बिलखत बाड़ी दिने-रतिया, चढ़ल अदहन पे होखे...
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