भूत होला का ?
– नीमन सिंह बात १९८० के बरसात के समय के ह. हमरा खेत में धान रोपे खातिर बेड़ार में बिया उखाड़े लागल मजदूर बिया उखाड़त रहले सन. बगल में भिंडा रहे पोखरा के एक तरफ, दोसरा तरफ मुरघटिया रहे. मजदूरन में एगो मजदूर ६ फीट लमहर बाकिर...
Read More– नीमन सिंह बात १९८० के बरसात के समय के ह. हमरा खेत में धान रोपे खातिर बेड़ार में बिया उखाड़े लागल मजदूर बिया उखाड़त रहले सन. बगल में भिंडा रहे पोखरा के एक तरफ, दोसरा तरफ मुरघटिया रहे. मजदूरन में एगो मजदूर ६ फीट लमहर बाकिर...
Read Moreभोजपुरिका परिवार का ओर से सभके नव वर्ष आ चइती नवरात्र के शुभारंभ (३१.३.२०१४) का अवसर पर बहुत बहुत...
Read Moreरंग बरसे भींजे चूनर वाली वाला गाना के एगो लाइन आजु बरबस याद आवत बा कि चाभे गोरी के यार बलम तरसे रंग बरसे. आ साथही याद आवत बा लइकाईं में सुनल एगो कहानी के बाल नायक के बोल कि सात गाय के सात चभोका, चौदह सेर घीव खाँउ रे, कहाँ बारे...
Read MorePosted by Editor | Mar 22, 2014 | पुस्तक चर्चा, भाषा, साहित्य |
कुछ साथी-सहयोगियन का सुझाव / निहोरा पर जब ‘प्रेम’ पर केन्द्रित कविता पर अंक के बिचार बनल त हम जल्दी-जल्दी भोजपुरी कवियन से संपर्क सधनी. ओइसे त प्रतिक्रिया उछाहे भरल रहे, बाकिर कुछेक भाई लोग अइसनो मिलल, जे या त लजइला लेखा या अजीब...
Read Moreफगुआ के दिन नियराइल बा आ साथे साथ चुनावो के दिन नियराइल जात बा. वइसे त नेता हरमेसा से मुँहफट बेलगाम होत आइल बाड़ें बाकिर अबकी का चुनाव में एह बेलगामो प कवनो लगाम लागत नइखे लउकत. सभे अपना विरोधियन के लेवारे में लागल बा. त हमहू...
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