Category: साहित्य

डेढ़ अछरी पाठशाला

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पेट आ पाटी का बीच खाई ना भर सकला से रूसल रहि गइली सुरसती हमरा बंश से आ हमरा अंश से जामल कवनो बिरवा पनिगर ना हो सकल हम ना बो सकलीं सेंउठियाइल ‘सुखिया’ का कोख में मेधा के ब्लाॅक...

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भोजपुरी गीतन में सुराज अउर गाँधी

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ इतिहास के सचाई ह कि बिहार के चंपारण जिला में अंगरेजन के बनावल निलही कोठियन के अत्याचार आ आतंक से त्रस्त होके राजकुमार शुक्ल साल 1916 में एहिजा के पीड़ितन के सनेसा ले के लखनऊ चहुँपले....

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बेटा अफसर बाड़ें

– डॉ.रमाशंकर श्रीवास्तव बाबूजी के केतना हाली समझवले होखब कि रउआ हमरा के अफसर मत कहीं. बड़का तनखाह पवला से का भइल, हम त सरकारी दफ्तर के एगो कलर्को से गइल-गुजरल बानी. रउआ मन में अपना जमाना के इयाद सटल बा. अंगरेजन के समय रहे....

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आदमी बाड़न? (ललित निबन्ध)

– रामजीत राम बेटा के आदमी बनावे के तइयारी बड़ा जोर से बा कि बेटा के पढ़ाइब आ आदमी बनाइब. आजु आदमी के अरथ बदल गइल बा. इ देखि के कि आदमी बने आ बनावे के कला एतना तेज हो गइल बा कि डर लागता. एह तुफान के आवेश में सब मर्यादो टूटे...

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दू गो गीत

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पहिल गीत कवन गाईं एह गीतन का गाँव में पाहुन-सन मन रहल लजाइल. धनखेती में फूटल सोना रुपनी बइठल बीनत मोना जाँता से जिनिगी लपटाइल छंद झर रहल घर का कोना पाकड़ का पतइन से चिरइन के शब्द झरल...

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