Category: साहित्य

कबीर

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ मत पूछीं कथा जलम के कुछ कथा गढ़े दीं हमके ई बोलत चलल कबीरा हीरदा से निकलल हीरा. हे माई ! त जनि बोलऽ ऊ दरद कहीं जनि खोलऽ आँखिन का पानी से तू अपना अँचरा के धो लऽ. अपना छप्पर छान्ही में गंगा...

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भूत होला का ?

– ‍नीमन सिंह बात १९८० के बरसात के समय के ह. हमरा खेत में धान रोपे खातिर बेड़ार में बिया उखाड़े लागल मजदूर बिया उखाड़त रहले सन. बगल में भिंडा रहे पोखरा के एक तरफ, दोसरा तरफ मुरघटिया रहे. मजदूरन में एगो मजदूर ६ फीट लमहर बाकिर...

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चबा ना सकीं त चभुलाई काहे ना (बतकुच्चन – १५३)

रंग बरसे भींजे चूनर वाली वाला गाना के एगो लाइन आजु बरबस याद आवत बा कि चाभे गोरी के यार बलम तरसे रंग बरसे. आ साथही याद आवत बा लइकाईं में सुनल एगो कहानी के बाल नायक के बोल कि सात गाय के सात चभोका, चौदह सेर घीव खाँउ रे, कहाँ बारे...

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‘प्रेम-कविता’ पर केन्द्रित पाती के अंक

कुछ साथी-सहयोगियन का सुझाव / निहोरा पर जब ‘प्रेम’ पर केन्द्रित कविता पर अंक के बिचार बनल त हम जल्दी-जल्दी भोजपुरी कवियन से संपर्क सधनी. ओइसे त प्रतिक्रिया उछाहे भरल रहे, बाकिर कुछेक भाई लोग अइसनो मिलल, जे या त लजइला लेखा या अजीब...

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