श्रेणी: साहित्य

अस्तित्व संकट से जूझत भोजपुरी बियाह गीत के परंपरा

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एहमें कवनो संदेह नइखे कि लोकसाहित्य में लोकगीत के जगह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बाटे. जनजीवन में एकरा व्यापक प्रचार के स्वीकार करत राधावल्लभ शर्मा जी मानतानी कि ई गीत भावुक आ संवेदनशील जनता के हृदय...

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भोजपुरी सिनेमा के खबर लेत भोजपुरी पंचायत के अगस्त २०१३ वाला अंक

भोजपुरी पंचायत अगस्त २०१३ के अंक पिछलके हफ्ता आ गइल रहुवे हमरा मेलबाक्स में बाकिर कुछ अउरी काम में...

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भोजपुरी किताब छपवा चुकल लेखक प्रकाशकन से एगो निहोरा

बहुत खुशी के बात बा कि रउरा आपन भोजपुरी किताब छपववले बानी. अपना ओह किताब के विज्ञापन रउरा अँजोरिया परिवार के नयका बेबसाइट प दीं. विज्ञापन शुल्क सिर्फ एकबार देबे के होखी आ ऊ विज्ञापन हर साल रउरा से पूछ के बिना कवनो शुल्क लिहले...

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कइसन रही अगर अँजोरिया भोजपुरी किताब प्रकाशन का मैदान में उतरे?

किताब के लिखो जब केहू छापही वाला नइखे. किताब के छापो जब केहू खरीदही वाला नइखे. किताब कइसे खरीदे केहू जब किताब लिखइबे ना करी, छपबे ना करी. किताब कइसे खरीदाव जब घर खरची चलावले मुश्किल होखल जात बा. समस्या विकट बा. कहाँ से शुरू कइल...

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