‘कथ’ आ शिल्प के तनाव में अर्थ के ‘लय
डॉ. उमाकान्त वर्मा (अपना कवनो परिचित-अपरिचित, बोझिल स्थिति से उकेरल प्रभाव के मानसिक दबाव के महसूस...
Read Moreडॉ. उमाकान्त वर्मा (अपना कवनो परिचित-अपरिचित, बोझिल स्थिति से उकेरल प्रभाव के मानसिक दबाव के महसूस...
Read Moreलाल बिहारी लाल सैंया बिना लागे नाहीं मनवा हो रामा,चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.सुना-सुना लागे ला...
Read Moreडॉ. हरेश्वर राय सियासी छेनी से कालिमा तरासल बिया I चांदनी हमरा घर से निकासल बिया II भोर के आँख...
Read More– ऋचा चलऽ, फेरु सपनन के फेंड़ लगाईं जा ! मउरल-दनात अमराई से अलगा सड़की का गुलमुहरन का नीचे...
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