फाग गीत २
-डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. बुढ़वो जोबन राग अलापी ली अङड़ाई चशमो के ऊपर भउजी काजर लगवाई बुनिया...
Read More-डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल फगुआ कहीं भा होली, ई बसंतोत्सव हउवे. बसंत जब चढ़ जाला त उतरेला कहाँ ? एहीसे त होली के रंगोत्सव के रूप में मनावल जाला. प्रकृतियो हमनी के साथ देले. नु ठंढा नु गर्मी, का मनभावन मौसम होला ! रंगन के महफिल में...
Read More– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एहमें कवनो संदेह नइखे कि लोकसाहित्य में लोकगीत के जगह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बाटे. जनजीवन में एकरा व्यापक प्रचार के स्वीकार करत राधावल्लभ शर्मा जी मानतानी कि ई गीत भावुक आ संवेदनशील जनता के हृदय...
Read MorePosted by Editor | Feb 10, 2013 | पुस्तक चर्चा, भाषा, समीक्षा, साहित्य |
‘विविधा’ सुप्रसिद्ध आचार्य पांडेय कपिल द्वारा संपादित भोजपुरी पत्रिकन के संपादकीय आलेखन के संग्रह हऽ. ई सभ आलेख उहाँ के द्वारा संपादित लोग, उरेह, भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (त्रैमासिक) आ भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका (मासिक) के दिसंबर,...
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