महीना: मार्च 2012

का हमनी का एह तंत्र के लोकतंत्र कह सकीलें ?

– पाण्डेय हरिराम सरकार आ जनता के रिश्ता पर बात करे के होखे त बहुते दिक्कत बुझाला. अब परे साल रामलीला मैदान में अधरतिया भइल पुलिस कार्रवाईए के बात लीं. एह पर पिछला बियफे का दिने कोर्ट फैसला सुनवलसि. ई फैसला ओह सबले बड़ सवाल...

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साल २०२५ में कहल जाई : एगो लोक भाषा होखत रहुवे

बाजार के दबाव में तिल-तिल कर के मरत भोजपुरी भाषा के दुर्दशा लेके हम कुछ समय पहिले एगो उपन्यास लिखले रहीं “लोक कवि अब गाते नहीं.” इंडिया टुडे में एकर समीक्षा लिखत मशहूर भाषाविद् अरविंद कुमार तारीफ के पुल बान्हत एगो...

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टटका खबर, शनिचर, २४ मार्च २०१२

शिक्षा यूपी के हर प्रखंड में आईटीआई खोले के बात व्यावसायिक शिक्षा मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी कहले बाड़न. अबहीं राज्य में सरकारी आ निजी मिला के साढ़े बारह सौ औद्योगिक शिक्षण संस्थान बाड़ी सँ. पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स खातिर ऑन...

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सिनेमा भोजपुरी में व्यस्त बाड़ी प्रिया कपूर

कहल जाला कि “दृढ संकल्प, मज़बूत इरादा आ कुछ कर गुजरे क जूनून इन्सान के ओकरा निशान ले चहुँपाइये देला.” आ इहे होखत बा गया, बिहार के मूल निवासी प्रिया कपूर का साथे जे एक साल के कड़ेर संघर्ष का बाद बिना कवनो गाड फादर के...

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"गुलाम" का गिरफ्त में पायल सेठ

अभिनेत्री पायल सेठ के कारनामा अजीबो-गरीब बा. कबो “जंजीर” में जकड़ा जाली त कबो केहू के “क ख ग” पढ़ावे लागेली. आ अब त खुदे “गुलाम” का शिकंजा में कैद हो गइल बाड़ी. जी हाँ, पायल सेठ लगातार एक के...

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