नइहर रहाइ ना आ ससुरा सोहाइ ना

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

#भोजपुरिया चिट्ठी #ईरान-इजरायल-युद्ध #रसोई-गैस #डॉ-रामरक्षा-मिश्र-विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-32

आइल भोजपुरिया चिट्ठी

नइहर रहाइ ना आ ससुरा सोहाइ ना


लभेरन एकादशी के पारन कइके काकी का ओर निकल गइले। काकी घर का लोगन का हँउजारि में उजबुजाइल रहली। लभेरन गोड़ लागिके पारन का बारे में पुछले। काकी कहली- हँ हो जइसे-तइसे क लेले बानी। गैस के लेके घर में अइसन तूफान मचल बा कि का कहीं! काल्हुए से लोग भिनसहरे से लाइन में लागऽता आ नंबर आवे से पहिलहीं काउंटर बन्न हो जाता। अब देखऽ एह सरकार का करनी में अउर कवन-कवन दिन देखल बाकी बा!

अब तक त लभेरन चुप रहलन बाकिर एह बात पर भड़कि गइले- अइसे काहें कहतानी काकी? भुला गइलीं एहसे पहिले वाला दिन? साल में क गो गैस सिलिंडर मिली- ई फिक्स हो गइल रहे, रउँआ खाईं भा उपासे रहीं- एहसे सरकार के कवनो मतलब ना रहे। ओहू सिलिंडर खातिर भोरहीं से कई दिन तक लाइन में लागे के परत रहे। ओह घरी जतना महङा रहे, दस-बारह बरिस बादो ओकरा से त अबहिंयो सस्ते बा। घरे बइठले गैस बुक हो जाता आ घर पर चहुँप जाता, ई असुविधा हटे? आजु का प्रॉब्लम के ईहे कारन बा कि मैंनेज्मेंट पर चेकिंग टाँठ हो गइल बा, बाकिर घर-परिवार खातिर गैस के किल्लत नइखे। सुनऽतानी कि अब त कमर्शियलो सिलेंडर के डिलिभरी शुरू हो गइल।

काकी नरमइली- त काहें अचानक अइसे हो गइल हऽ लभेरन?
लभेरन बतावे शुरू कइले- सभका मालुम बा कि ईरान आ इजराइल में युद्ध छिड़ल बा आ एह युद्ध में संसार के अनेक देश सीधे भा घूमि-फिरि के शामिल बा। तेल जहाँ से आवेला ओही एरिया में धुँआधार लड़ाई चल रहल बा त स्वाभाविक बा कि दुनिया भर में तेल आ कुकिंग गैस के किल्लत होइबे करी। एहमें नया बात का बा? बाकिर हमनी के सौभाग्य बा कि हमनी किहाँ अभी कमी नइखे भइल। काकी तनी रउएँ सोचीं! एह भीषण युद्ध का कारन जब दुनिया के महाशक्ति आर्थिक संकट से जूझत होखऽ सन, तब भारत जइसन घना आबादी वाला देश में आपूर्ति शृंखला के स्थिर बनाके राखल कवनो चमत्कार से कम बा का? तबहुँओ, कुछ लोगन के निगेटिविटिए में सुख ढूँढ़े के सुभाव बनि गइल बा। दुनिया में तेल आ गैस के कीमत आसमान छुअतारी सन, बाकिर भारत कूटनीतिक संतुलन बनाके अपना ऊर्जा जरूरत के सुरक्षित रखले बा। लोगन के ई नइखे लउकत कि पड़ोसी देसन भा विकसित देसन के का हाल बा, उनुका त बस आपन छोट असुविधा बहुत बड़ लागतिया।

काकी बोलली- चारू ओर धुमगाजर काहें मचल बा? सभका हाथ में मोबाइल बा, घरे-घरे टीवी बा, त लोगन के एह बात के जानकारी नइखे का? लभेरन कहले- सोशल साइट पर फेक निउज आ अफवाह के फइलला का कारने त ई परेशानी आइल बा। विपक्षो के एगो बढ़िया मोका मिलल बा बहती गंगा में हाथ धोवे के, केहूँ पीछे काहें रहो? विपक्ष का सङहीं आज जनतो के एके हालत हो गइल बा- नइहर रहाइ ना आ ससुरा सोहाइ ना। कवनो तरह से इहाँ सभ के खुश नइखे रहे के, चएन से नइखे बइठे के। प्रधानमंत्री जो युद्ध में कूद जासु, त ईहे लोग चिल्लाए शुरू क दी कि “आपन घर जरता आ चलल बाड़े दुनिया बँचावे।

काकी अब तक बहुत कुछ बूझि गइल रही। ऊ पुछली कि जब सरकार का पासे पर्याप्त स्टॉक रहबे कइल त अचानक एह तरह के गैस वाली कठिनाई काहें बढ़ि गइलि?
लभेरन का चेहरा पर गंभीरता आ गइल। ऊ कहले- जानऽतानी काकी! चोरवा के मन बसे कँकरी का खेत में। ई दर्द कालाबाजारी के दर्द हटे, जवना के रुख धूर्त नेता लोग पब्लिक का ओर मोरि देले बाड़न। साँच त ई बा कि जब सिस्टम के नकेल कसल गइल, त ओह ‘बिचौलियन’ के पोंछि दबा गइलि जे गैस सिलिंडर से मलाई मारत रहलन। अब जब उनुकर कमाई रुकल, त ऊ लोग “उल्टा चोर कोतवाल के डाँटे” वाली नीति अपना लिहल। अफवाह फइलावल, पैनिक पैदा कइल आ आम आदमी के डेरवावल- ई सभ ओह लोगन के चाल हटे, जेकरा ईमानदारी सोहात नइखे। तनी तुलना त करीं! दुनिया का ओह देसन के देखीं, जहाँ पेट्रोल आ गैस खातिर दंगा प दंगा हो रहल बा जबकि भारत आजु अपना कूटनीति का दम पर एगो ‘सुरक्षित द्वीप’ नियन अपना मउज में बाटे।

दुनिया में ईरान-इजराइल का बीचे युद्ध कवनो ‘लइका-लइकी’ के खेल ना हटे, बलुक असली वाला महायुद्ध हटे। चारू ओरि तेल आ गैस खातिर ‘हाहाकार’ मचल बा, विकसित देश भी कवनो आशंका से थर-थर काँप रहल बाड़े सन आ हमरा भारत में कुछ लोग तिनका के ताड़ बना के पिनपिनात बाड़न। आजु जबकि दुनिया जल रहल बिया आ हमनी का सुरक्षित बानी जा, ई कवनो छोट बात बा? एलपीजी के तनिका दिक्कत का आ गइल, लोग अइसे बेवहार करे लागल, जइसे परलय आ गइल होखे। लोगंन के चाहीं कि अपना दही के खऽट बूझल छोड़सु। जो हमनिए का अपना देश का मजबूती के ना समुझबि जा त दुनिया त बइठले बिया हमनी के मजाक उड़ावे खातिर।
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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030

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