कांच कोइन
– संतोष कुमार ‘इहाँ हमरा से बड़का हीरो कवनो बा का ? हम अभिए चाहीं त निमन निमन जाने के ठीक कर दीं’ – किसुन दारु पी के अपना घर के दुअरा पर पैतरा कइले रहलन. आपन मेहरारू के हांक लगावत कहलें – ‘का...
Read More– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पेट आ पाटी का बीच खाई ना भर सकला से रूसल रहि गइली सुरसती हमरा बंश से आ हमरा अंश से जामल कवनो बिरवा पनिगर ना हो सकल हम ना बो सकलीं सेंउठियाइल ‘सुखिया’ का कोख में मेधा के ब्लाॅक...
Read More– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ इतिहास के सचाई ह कि बिहार के चंपारण जिला में अंगरेजन के बनावल निलही कोठियन के अत्याचार आ आतंक से त्रस्त होके राजकुमार शुक्ल साल 1916 में एहिजा के पीड़ितन के सनेसा ले के लखनऊ चहुँपले....
Read More– डॉ.रमाशंकर श्रीवास्तव बाबूजी के केतना हाली समझवले होखब कि रउआ हमरा के अफसर मत कहीं. बड़का तनखाह पवला से का भइल, हम त सरकारी दफ्तर के एगो कलर्को से गइल-गुजरल बानी. रउआ मन में अपना जमाना के इयाद सटल बा. अंगरेजन के समय रहे....
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