Category: साहित्य

भोजपुरी ‘उन्नीस’ नइखे बाकिर “बीस’ के बनाई ?

– अशोक शर्मा ‘अतुल’ कवनो विषय भा प्रसंग पर जब कवनो बतकही चलेला त ओकरा समेसया पर अधिक जोर रहेला – हई ना भइल, हउ ना भइल. त फलाने जिमेवार, चिलाने कसूरवार. कहे के मतलब कि जेतना माथापच्ची समेसया बतावे पर होला...

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अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन में ई का हो रहल बा ?

– गंगा प्रसाद अरुण सम्मेलन पत्रिका के कार्यवाही विशेषांक, मार्च अप्रैल 2014, मिलल. एह अंक के प्रायोजक लोग के उदारता सराहे जोग बा. बाकिर संपादकीय में ‘विचार करे लायक कुछ बात’ सचहूँ विचारे जोग बा. 1973 में...

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कांच कोइन

– संतोष कुमार ‘इहाँ हमरा से बड़का हीरो कवनो बा का ? हम अभिए चाहीं त निमन निमन जाने के ठीक कर दीं’ – किसुन दारु पी के अपना घर के दुअरा पर पैतरा कइले रहलन. आपन मेहरारू के हांक लगावत कहलें – ‘का...

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सखी

– डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना लोर से भरल आँख अउरी मुँह पर पसरल उदासी साफ साफ झलका देला कि कवनो परानी दुख में केतना गोताइल बा. बेयाकुल चिरई के बोली में चहचहाहट ना होला, बस बुझवइया के समझला के फेर हऽ. एही लेखा-जोखा में नीतू के...

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डेढ़ अछरी पाठशाला

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पेट आ पाटी का बीच खाई ना भर सकला से रूसल रहि गइली सुरसती हमरा बंश से आ हमरा अंश से जामल कवनो बिरवा पनिगर ना हो सकल हम ना बो सकलीं सेंउठियाइल ‘सुखिया’ का कोख में मेधा के ब्लाॅक...

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