Category: साहित्य

सखी

– डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना लोर से भरल आँख अउरी मुँह पर पसरल उदासी साफ साफ झलका देला कि कवनो परानी दुख में केतना गोताइल बा. बेयाकुल चिरई के बोली में चहचहाहट ना होला, बस बुझवइया के समझला के फेर हऽ. एही लेखा-जोखा में नीतू के...

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डेढ़ अछरी पाठशाला

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पेट आ पाटी का बीच खाई ना भर सकला से रूसल रहि गइली सुरसती हमरा बंश से आ हमरा अंश से जामल कवनो बिरवा पनिगर ना हो सकल हम ना बो सकलीं सेंउठियाइल ‘सुखिया’ का कोख में मेधा के ब्लाॅक...

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भोजपुरी गीतन में सुराज अउर गाँधी

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ इतिहास के सचाई ह कि बिहार के चंपारण जिला में अंगरेजन के बनावल निलही कोठियन के अत्याचार आ आतंक से त्रस्त होके राजकुमार शुक्ल साल 1916 में एहिजा के पीड़ितन के सनेसा ले के लखनऊ चहुँपले....

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बेटा अफसर बाड़ें

– डॉ.रमाशंकर श्रीवास्तव बाबूजी के केतना हाली समझवले होखब कि रउआ हमरा के अफसर मत कहीं. बड़का तनखाह पवला से का भइल, हम त सरकारी दफ्तर के एगो कलर्को से गइल-गुजरल बानी. रउआ मन में अपना जमाना के इयाद सटल बा. अंगरेजन के समय रहे....

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आदमी बाड़न? (ललित निबन्ध)

– रामजीत राम बेटा के आदमी बनावे के तइयारी बड़ा जोर से बा कि बेटा के पढ़ाइब आ आदमी बनाइब. आजु आदमी के अरथ बदल गइल बा. इ देखि के कि आदमी बने आ बनावे के कला एतना तेज हो गइल बा कि डर लागता. एह तुफान के आवेश में सब मर्यादो टूटे...

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