छठ गीत
– ओ.पी. अमृतांशु अँखिया से बही गइले, लोरवा के नदिया, छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो राम. गोबरे लिपवलीं, पुरवलीं चउकावा, जगमग-जगमग, जरेला दियनवा, कोसिया भरवलीं, कईलीं घीउए हुमदीया. छठी माई,सुनिलीं तीवईया के अरजिया हो...
Read More– नूरैन अंसारी अबकी बार एगो दिया तोहरा याद में जराएब. कलिख अपना मन के ओकरा रौनक से मिटाएब. कुछ ना मिलल नफरत कर के, हो गइनी अकेला. लोर भरल अंखिया से देखनी, हम दुनिया के मेला. छलकत अंखिया के गगरी के, हँसी से सजाएब. अबकी बार...
Read Moreघात मीत के, बात प्रीत के, खेल कहानी हार जीत के, सबका के बतलाईं कइसे? गीत नया हम गाईं कइसे? दोसरा के का बाति चलाईं अनकर के का दोष देखाईं अपने हार सुनाईं कइसे ? गीत नया हम गाईं कइसे ? अपने चिन्ता, अपने फिकिरे कोल्हू के सभ बैल बनल...
Read More– ओ.पी. अमृतांशु नीमिया भइली कचनार, महारानी रउरी अँगना में ! लहसेला दावाना-मडुयावा, फुलाइल बेला फुलवा नू हो, ए मईया, गमकेला ओढ़ऊल हार महारानी रउरी अँगना में ! चम-चम चमकेला मुखड़ा, कि लाखो चंदा टूकड़ा नू हो, ए मईया, दमके...
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