भोजपुरी कजरी – पिया बिना जिया नाही लागे मोर भवनवा ना
– श्याम कुंवर भारती (राजभर) बदरा घिरी घिरी आवे झुर झुर सवनवा ना। पिया बिना जिया नाही लागे...
Read More– श्याम कुंवर भारती (राजभर) बदरा घिरी घिरी आवे झुर झुर सवनवा ना। पिया बिना जिया नाही लागे...
Read MorePosted by Editor | May 20, 2024 | कविता, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
एहसास मर गइल बा – डॉ इकबाल एहसास मर गइल बा, जिंदा शरीर बाटे। धुँधला गइल बा अक्षर, खाली लकीर...
Read More– पप्पू मिश्र ‘पुष्प’ बिहार में का नइखे ! राम के प्रताप बा शोक बा संताप बा कृपा...
Read More– अरविन्द ‘अकेेला’ पिया मोर गइलेें बिदेेस, लवटि घर अबहीं ना अइलेें बसलेें सवतिया...
Read More– शिवानंद मिश्र शिकारी लहलह हरीयर धान ह मानस, चाउर पुरान चिरान ह मानस, तुलसीजी के थान कहीं...
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