समाज आज कऽ आ एतना बा पानी अँखियन में
– डॉ कमलेश राय, (एक) समाज आज कऽ जाने कइसे रही निरोग बढ़ल जात बाटे दिन पर दिन अब अखबारी लोग ।...
Read More– डॉ कमलेश राय, (एक) समाज आज कऽ जाने कइसे रही निरोग बढ़ल जात बाटे दिन पर दिन अब अखबारी लोग ।...
Read More(एक) बेंड़ल बजर किंवाड़, यार अइले, चलि गइले ! ना सुनि परल पुकार, यार अइले, चलि गइले ! सूरज-चन्दा कऽ...
Read More– भरत मिश्रा ऊ कइसे लिखिहे चिट्ठी हमरा के जमाना का दौड़ में फोन आ गइल. हम सोचनी जा के मिलब...
Read More– संतोष पटेल हाथी त अब रहल ना, बाकिर सीकड़ बाचल बा. नदी त सूख गइल, अब कीचड़ बाचल बा. नीक रहे...
Read More– राकेश कुमार पाण्डेय (1) माटी धूर क गंवई जिनगी, गइया भईंस चराईं। खेती-बारी भीर बहुत बा,...
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