Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ४७

आजुकाल्हु चुनाव के मौसम बा आ बरसाती ढबुसा बेंग का तरह नेता उछल उछल के टरटरात बाड़े. सभे लागल बा एक दोसरा के भकठा बतावे, साबित करे में आ अपना के दूधे नहाइल बतावे में. अब सोचीं त भकठा के मतलब होला बिगड़ल, खराब. आ जे अइसन होला ओकरा...

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बतकुच्चन – ४६

पिछला बेर आखिर में पूरा पर पूरा कतार बन गइल रहे बाकिर चरचा ना चलल रहे. आजु ओहि पुर से पूर के सफर पर चलल जाव. पुर कहल जाला नगर भा शहर के बाकिर एकर इस्तेमाल कवनो शब्द का अन्त में प्रत्यय के रूप में बेसी होला, जइसे कि भागलपुर,...

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बतकुच्चन – ४५

पिछला बेर पोजिटिव थिंकिंग के बात सामने आइल रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी. पोजिटिव थिंकिंग, माने कि सकारात्मक सोच, माने कि सकारथ सोच ओह सोच के कहल जाला जवन आदमी के मनोरथ पूरा करे, ओकर ईच्छा पूरा करे भा ओकर सोचल सगरी काम...

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बतकुच्चन – ४४

शब्द का बहाने बतकुच्चन होला. आ शब्द एगो भा अधिका ध्वनियन के अइसन समूह ह जवना के कवनो मतलब निकलत होखो. मतलब नइखे निकलत त ऊ शब्द कहाइये ना सके. जइसे कि गिलगिलइला के शब्द ना कहल जा सके. अलग बाति बा कि एह काम के बतावे खातिर...

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बतकुच्चन – ४३

महुआ बीनत लछमिनिया के देखनी, हर जोतत महिपाल, टिकठी चढ़ल अमर के देखनी, सबले नीमन ठठपाल ! नाम कई बेर सार्थक ना हो पावे आ नामित आदमी भा संस्था भा चीझु नाम का हिसाब से ना चलि पावे. बाकिर एकर मतलब इहो ना होला कि नाम हमेशा गलते होखेला....

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