बतकुच्चन – ४४
शब्द का बहाने बतकुच्चन होला. आ शब्द एगो भा अधिका ध्वनियन के अइसन समूह ह जवना के कवनो मतलब निकलत होखो. मतलब नइखे निकलत त ऊ शब्द कहाइये ना सके. जइसे कि गिलगिलइला के शब्द ना कहल जा सके. अलग बाति बा कि एह काम के बतावे खातिर...
Read Moreशब्द का बहाने बतकुच्चन होला. आ शब्द एगो भा अधिका ध्वनियन के अइसन समूह ह जवना के कवनो मतलब निकलत होखो. मतलब नइखे निकलत त ऊ शब्द कहाइये ना सके. जइसे कि गिलगिलइला के शब्द ना कहल जा सके. अलग बाति बा कि एह काम के बतावे खातिर...
Read Moreमहुआ बीनत लछमिनिया के देखनी, हर जोतत महिपाल, टिकठी चढ़ल अमर के देखनी, सबले नीमन ठठपाल ! नाम कई बेर सार्थक ना हो पावे आ नामित आदमी भा संस्था भा चीझु नाम का हिसाब से ना चलि पावे. बाकिर एकर मतलब इहो ना होला कि नाम हमेशा गलते होखेला....
Read Moreबतकुच्चन करत हमेशा याद रहेला कि बाते से आदमी पान खाला आ बाते से लात. अब बाति आ लात के अतना घन संबंध देखला का बावजूद बतकुच्चन के लति धरा गइल बा आ लति धरा जाव त फेर आदमी परिणाम के फिकिर छोड़ देला. हालांकि जरूरी नइखे कि लति हमेशा...
Read Moreपिछला दिने खूब बतकही सुने के मिलल आ हम बतरस लेत रहनी. बाकिर बतकही का दौरान बाताबाती आ गलथेथीओ सुने के खूब मिलल. त सोचनी काहे ना आजु बाते पर बतकुच्चन कइल जाव. बतकुच्चन करे वाला जरूरी नइखे कि बतबनवो होखे. बतकुच्चन करे आ गलथेथी करे...
Read Moreजेकरा खातिर चोरी कइनी उहे कहलसि चोर. पता ना सबले पहिले ई बाति के कहले रहुवे बाकिर आदिकवि वाल्मिकी का बारे में कहल जाला कि ऊ पहिले डकैत रहलन आ लूट मार क के परिवार चलावत रहले. बाद में जब पता चलल कि उनुकर परिवार उनुका पाप के...
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