Tag: बतकुच्चन

बतकुच्चन – ३२

एने कई दिन से अपना बिधुनाइल मन का चलते कुछ लिख ना पवले रहीं बाकिर काल्हु जब एक आदमी के धुनाइल देखनी त बतबनवा मन में बतकूच्चन होखे लागल. याद आवे लागल कुछ भोजपुरी कहाउत. बाते से आदमी पान खाला आ बाते से लात. एगो दोसर कहाउत ह बड़ जीव...

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बतकुच्चन – ३

एगो चर्चा में शब्द आ गइल कि रउरा त नायक हईं. बस मन में बिजली जस चमक उठल कि नायक के होला, नायक का ह ? आ याद पड़ल कि पिछला संस्करण में हम बतकुच्चन के दू गो कड़ी लिखले रहुवीं. फेर बात आइल गइल हो गइल आ बतकुच्चन दिमाग से उतरि गइल....

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