टैग: साहित्य

नीमिया रे करूवाइन

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन ह. जेकरा आँखि से इहां का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हंसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदीमी रात-दिन एक कइले रहेला. निकहा...

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भोजपुरी प्रकाशकन के मजबूरी

अँजोरिया के एगो साहित्यकार आ सम्मानित पाठक दिवाकर मणि जी के एगो टिप्पणी मिलल बा हमरा खातिर “भोजपुरी सिनेमा” के मतलब होला “टोटल बकवास”। हिन्दी सिनेमा के डी ग्रेड वर्जन भी कहल जा सकेला भोजपुरी सिनेमा के ।...

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फ्यूचर बहुत ब्राइट बा, चाचा!!

– दिवाकर मणि रामलुभाया चाचा, गोड़ लागिले. खुश रहऽ ए गुणगोबर. कहऽ का हाल-चाल बा? आजुकाल्हि त ना देखाई देत बाड़ऽ ना तहरे बारे में कुछु सुनाते बा, अईसन काहे हो? अउर तहरा चेहरा प ई खुशी टपक रहल बा, एकर रज का बाटे? बात-वात कुछो...

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जम्हुआ के छुअला के डर ना ह, परिकला के हऽ

भोजपुरी इलाका में एगो कहावत पहिले मशहूर रहे कि जम्हुआ के छुवला के डर नइखे, परिकला के बा. तब चिकित्सा सुविधा का अभाव में बहुते शिशू जनम का दू चार दिन का भितरे टिटनेस के शिकार हो जात रहलें. हँसुआ से नार कटात रहुवे आ अन्हार कूप...

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टटका खबर, बुध, २ जून

झारखण्ड में राष्ट्रपति शासन लागू शिबू सोरेन का आन्दोलन से जनमल झारखण्ड के सबसे बड़ समस्या खुद शिबू सोरेन बन गइल बाड़े. उनका बिना कवनो सरकार बनावल चलावल संभव नइखे आ उनका साथ आवे के केहू तइयार नइखे. मजबूरन केन्द्र सरकार ओहिजा...

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