भोजपुरी एगो पुरान, समर्थ आ दमगर भाषा
भोजपुरी एगो पुरान, समर्थ आ दमगर भाषा – चंद्रेश्वर भोजपुरी के बारे में एगो बहुप्रचारित मिथ्या...
Read MorePosted by Editor | Nov 24, 2024 | पुस्तक चर्चा, समीक्षा, साहित्य |
भोजपुरी एगो पुरान, समर्थ आ दमगर भाषा – चंद्रेश्वर भोजपुरी के बारे में एगो बहुप्रचारित मिथ्या...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी चले दीं, प्रयोग बहे दीं धार काल्हु “ये दिल माँगे मोर” पर बहस होत रहे. हम कहलीं कि भाई ‘मोर’ का जगहा ‘और’ कहलो पर त कुछ बिगड़ी ना. फेर काहें एकर ओकालत करतारे लोग. हर भाषा में लिखे-पढ़ेवाला...
Read Moreडॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी दीया-दियरी के दिन बहुरल तीन-चार दिन पहिले कपड़ा-ओपड़ा कीने खातिर निकलल रहीं जा. प्लेटफॉर्म प चढ़ते जवन लउकल, ओसे त चका गइलीं हम. जहाँ एक दिन पहिलहूँ खोजला पर पिछला जनम के दिया-दियरी मिलेले आ ऊहो...
Read More– प्रमोद कुमार तिवारी हमनी के ई बतावत कबो ना थाकेलीं कि भोजपुरी एगो अइसन भाषा हऽ जवना में ‘मैं’ हइए ना हऽ, एहमें खाली ‘हम’ होला. मैं आ हम में सबसे बड़ अंतर तऽ इहे होला नू कि ‘मैं’ खाली अपना बारे में सोचेला, जबकि ‘हम’ सबकर...
Read MorePosted by Editor | Nov 28, 2014 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का बीच भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक में भोजपुरी में मिलल...
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