श्रेणी: सतमेझरा

सब गाँव के रस्ता रोटिए क ओर जाला

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद जब कलकाता अइले त दू गो चीज देखि के अचरज में परि गइले. एक त हावड़ा के पुल आ ओहपर चलत लइका लईकी, आदमी मेहरारू, आ दोसरका इहवां के रेक्शा. रेक्शा देखि के सांचहुं लोग के बुद्धि काम ना करि. एह में...

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भगवान एह छात्रन के सुबुद्धि देस

– जयंती पांडेय जान जा ए रामचेला, ई सीपीएम वाला लोग एकदम बेवकूफे होला. जेकर बड़ाई करे के ओकर मार शिकायत करऽता लोग. अब नरेन्दर मोदी कोलकाता आ के ममता दीदी के सरकार के बड़ाई का कर गइले कि बुझाता कि ई लोग के पेट में कलछुल...

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गाँधीवाद का बदले कई गो नया वाद

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद सुर्ती फाँक के रामचेला से कहले, जान जा ए बबुआ, आज काल्हु अपना देस के राजनीति में कई गो नया प्रकार के वाद चल गइल बा. जइसे आजादी का जमाना में गाँधीवाद चलल रहे आ नेहरू शास्त्री का जमाना में...

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आधा अल्पसंख्यकन के मुकदमा कवना कोर्ट में सुनल जाई?

भउजी हो! का बबुआ? अबकी त लागत बा कि होली के हत्या हो गइल. काहे बबुआ? देखतानी कि फगुआ के दू चार गो दिन रहि गइल बा बाकिर कतहूँ केहू का देंहि पर रंग नइखे लउकत. हो सकेला कि लोग महाराष्ट्र का सूखा का चलते एह साल होली पर रंग ना खेलत...

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