श्रेणी: सतमेझरा

जमाना का साथे नांवो बदलत बा

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला सड़क के जरिए बंगाल से अपना गाँवे लवटत रहे लोग. रस्ता में एक जगह लेंग्चा पंतुआ के दोकान रहे. ओहिजा लेंग्चा के नांव से न जाने कतना दोकान रहे. कवनो लेंग्चा महल, त कवनो लेंग्चा पैलेस, त...

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जोरु के भाई आ ममहर के बात

भउजी हो! का बबुआ ? ओह पट्टी के लोग बहुते परेशानी में पड़ गइल बा. काहे बबुआ? एक त अपना जीजा से परेशान रहबे कइल लोग तबले ममहरो से बवाल चहुँप गइल. केहू का मुँह से बकार नइखे फूटत. काहे फूटी ? ओह लोग के त खुश होखे के चाहीं कि सगरी...

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सांसद लोग के कुश्ती लड़े के चाहीं

– जयंती पांडेय रामचेला बड़ा चिंता में आ के बाबा लस्टमानंद के बतवलें, हो बाबा, सुनऽतारऽ ओलम्पिक से कुश्ती जइसन मर्दानगी वाला आपन देसी खेल हटावल जा ता. ई बात दोसर बा कि २२ नया खेल के शामिल करे खातिर कुछ पुरान खेल हटावल जा रहल...

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लंगटा पहिरी का आ बिछाई का ?

भउजी हो! का बबुआ? बजट पर तोहार राय का बा? लंगटा पहिरी का आ बिछाई का? ए बबुआ हमार त मतिए हेराइल बा घर चलावे में. पता ना लोग कइसे पूरा देश के बजट बना लेला हमरा से एगो परिवारे के बजट नइखे बनत. जवन रुपिया राउर भईया देबे लें घर चलावे...

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एटमासफीयर फ्रेंडली बना के धंधा करऽ

– जयंती पांडेय संसद के बइठक अब शूरू होखेवाला बा. ओही के तइयारी में भाजपो उठक बइठक क रहल बिया. संसद में कइसे सरकार के लुगा लूटल जाव. इ हमनी के लोकतंत्र ह. लेकिन करबऽ का? हमनी का एगो लोकतांत्रिक देश में रहत बानी सन, आ...

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