पइसा के सामने इज्जत के टंशन खतम
– जयंती पांडेय रामचेला आ के बतवले कि अरे, सुनलऽ हऽ बाबा, ओने घनश्याम चाचा के घर में महाभारत...
Read More– जयंती पांडेय रामचेला आ के बतवले कि अरे, सुनलऽ हऽ बाबा, ओने घनश्याम चाचा के घर में महाभारत...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ? अबकी त लागत बा कि होली के हत्या हो गइल. काहे बबुआ? देखतानी कि फगुआ के दू चार गो दिन रहि गइल बा बाकिर कतहूँ केहू का देंहि पर रंग नइखे लउकत. हो सकेला कि लोग महाराष्ट्र का सूखा का चलते एह साल होली पर रंग ना खेलत...
Read More– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद आ रामचेला सड़क के जरिए बंगाल से अपना गाँवे लवटत रहे लोग. रस्ता में एक जगह लेंग्चा पंतुआ के दोकान रहे. ओहिजा लेंग्चा के नांव से न जाने कतना दोकान रहे. कवनो लेंग्चा महल, त कवनो लेंग्चा पैलेस, त...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ ? ओह पट्टी के लोग बहुते परेशानी में पड़ गइल बा. काहे बबुआ? एक त अपना जीजा से परेशान रहबे कइल लोग तबले ममहरो से बवाल चहुँप गइल. केहू का मुँह से बकार नइखे फूटत. काहे फूटी ? ओह लोग के त खुश होखे के चाहीं कि सगरी...
Read More– जयंती पांडेय रामचेला बड़ा चिंता में आ के बाबा लस्टमानंद के बतवलें, हो बाबा, सुनऽतारऽ ओलम्पिक से कुश्ती जइसन मर्दानगी वाला आपन देसी खेल हटावल जा ता. ई बात दोसर बा कि २२ नया खेल के शामिल करे खातिर कुछ पुरान खेल हटावल जा रहल...
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