पोखरा में मछरी, नव नव कुटिया बखरा
दू बरीस से हर बेर गाँव के पोखरा के अधिका मछरी मुखिये जी का घरे जा रहल बा. कारण कि उनुका लगे महाजाल...
Read Moreदू बरीस से हर बेर गाँव के पोखरा के अधिका मछरी मुखिये जी का घरे जा रहल बा. कारण कि उनुका लगे महाजाल...
Read Moreजाल, जाला, जाली, जंजाल, संजाल, मायाजाल, इंद्रजाल, मोहजाल, महाजाल; पता ना कतना जाल आ कतना जाला कि सझुरावते परेशान हो जाए आदमी. जाल बुनल जाला, जाला लाग जाला आ जाली बनावल जाले. कबो दोसरा खातिर त कबो अपना खातिर. एह जाल के दायरा अतना...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..