राहि केतनो चलीं हम, ओराते न बा Posted by Editor | दिसम्बर 20, 2016 | कविता, साहित्य | (भोजपुरी ग़ज़ल) – शैलेंद्र असीम तहरी अँखिया में पानी बुझाते न बा पीर केतना सहीं हम, सहाते न बा... Read More
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