योगी के मंच से ‘चंपत’ भइल ट्रस्ट के रूतबा?
अयोध्या श्रीराम मन्दिर में भइल दान चोरी के मामिला पर, पिछला लेख का बाद बहुत कुछ भइल बा जवन एह काण्ड के अउर सनसनीखेज बना दिहले बा।
विशेष जाँच दल (SIT) अयोध्या पहुँच के जाँच शुरू क देहले बिया, आ मन्दिर के भीतर से चोरी के जवन ‘तरीका’ सामने आइल बा, उ जान के लोग हैरान बा।एह अनुवर्ती (Follow-up) लेख खातिर पूरा नया सामग्री, नया खुलासा, आ ट्रस्ट के बदलत भूमिका के ब्योरा नीचे दिहल गइल बा।

Image from chatGPT on Ayodhya mandir fund embezzlement
राम मन्दिर दान चोरी: बाथरूम के बहाने ‘नोटन के बिलाई’ आ SIT के जाल!
पिछला लेख में हमनीं देखले रहनीं कि कइसे लवकुश मिश्रा नाम के कर्मचारी के घरे गोबर (गोइठा) के ढेर से लाखन रुपिया बरामद भइल रहे। बाकिर पिछला हफ्ता में एह मामिला में जवन नया आ सनसनीखेज मोड़ आइल बा, उ पूरा गिरोह के पोल खोल रहल बा। अब ई साफ हो गइल बा कि ई कवनो एगो नौकर के चोरी ना, बल्कि मन्दिर के भीतर चल रहल एगो बहुत शातिर आ संगठित खेल ह।
चोरी के ‘बाथरूम मंतर’ आ सुरक्षा तंत्र के लूपहोल
जाँच एजेन्सी (SIT) आ पुलिस के जाँच से जवन खबर छन के बाहर आइल बिया, उ आँख खोल देवे वाली बा। लोग सोचत रहे कि कड़ा पहरा आ सीसीटीवी के सामने से नोट कइसे गायब हो गइल? त तरीका इहे रहे : नोट गिने वाला कमरा में ड्यूटी पर आवे आ ड्यूटी खतम क के जाए का समय त कड़ा चेकिंग होत रहे। बाकिर ड्यूटी के बीच में कवनो चेकिंग ना होत रहे। एकर फायदा बाथरूम के खेल खेल के उठावल जात रहल. नोट गिने वाला कुछ खास कर्मचारी बीच-बीच में ‘बाथरूम जाए के बहाने’ कमरा से बाहर निकलत रहलें। उ लोग नोटन के गड्डी अपना कपड़ा में लुका के बाहर निकसें, आ बाथरूम के कवनो गुप्त जगह पर छुपा देवें।बाद में माल साफ़। जब ड्यूटी खतम भइला पर मुख्य गेट पर उनकर चेकिंग हो जाव आ उ लोग ‘साफ़’ निकसें, त दोबारा चुपके से बाथरूम जा के छुपावल पैसा उठा के पार क देवें।
टेंपो चालक से मैनपावर मैनेजर:
एह हफ्ता जाँच के सुई खाली लवकुश पर ना, बल्कि अयोध्या के एगो अउर ‘टिन्नू यादव’ नाम के बड़हन मोहरा पर आ के टिक गइल बिया। बतावल जा रहल बा कि 1994-95 में टिन्नू यादव अयोध्या में टेंपो चलावत रहे। बाकिर मन्दिर प्रशासन में एंट्री भइला का बाद ओकर रूतबा एतना बढ़ गइल कि ओकरा हाथ में वॉकी-टॉकी आ पूरा मन्दिर परिसर के ‘मैनपावर मैनेजमेंट’ आ गइल। 22 हजार के नौकरी करे वाला टिन्नू का लगे महँग-महँग गाड़ियन के कतार लाग गइल। अकूत संपति खड़ा हो गइल। लवकुश आ टिन्नू का लगहीं मन्दिर के दानपेटी के चाभी रहत रहुवे।
सीसीटीवी के साथे ‘छेड़छाड़’ (Tampering) के सुराग
एसआईटी (SIT) के शुरुआती जाँच में ई बात पक्का हो गइल बा कि दान गिने वाला कमरा के सीसीटीवी कैमरा के साथे छेड़छाड़ (Tampering) कइल गइल रहे। कैमरा सिर्फ ‘खराब’ ना रहे, बलुक ओकरा फुटेज के जानबूझ के डिलीट कइल गइल भा कैमरा के रुख मोड़ के राखल गइल रहे ताकि चोरी के सबूत ना बचे। सुरक्षा अमला (Security Staff) के कई गो लोग अब एसआईटी के कड़ा रडार पर बा।
तीर्थ ट्रस्ट के भूमिका पर उठत तीखा सवाल
एह पूरा मामला में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भूमिका पर सबसे बेसी उंगली उठ रहल बावे। सवाल उठावल जा रहल बा कि FIR में देरी काहे भइल? जब ट्रस्ट के पदाधिकारी खुद दू हफ्ता से संदिग्ध कर्मचारियों के बइठा के पूछताछ करत रहलें आ पैसा बरामद करवा रहल रहलें, त उ लोग पुलिस में तुरंत एफआईआर (FIR) काहे ना दर्ज करवलसि? का कवनो बड़ चेहरा के बचावे के साज़िश रहे?
बड़ अधिकारी आ नेता घेरा में
भाजपे के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह जइसन लोग खुल के बोल रहल बा कि “जदि हम सच बोल देब त बहुत बड़ फसाद खड़ा हो जाई, काहे कि एकरा पीछे बहुत बड़ लोग बाड़ें”। अब उनुका एह बात के उनुकर खुन्नस कह के अनदेखी कइल गलत होखी. महिला पहिलवानन के मामिला का दौरान जवना तरह भाजपा बृजभूषण सिंह का खिलाफ कार्रवाई कइलसि तवना के खुन्नस उनुका मन में ना होखी इहो नइखे कहल जा सकत।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरा
पिछला दिने जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के दौरा पर गइनी ओहू से बहुत कुछ खबर के संकेत मिलल बा। कहे ला त ई दौरा ‘रामायण वैक्स म्यूजियम’ के उद्घाटन खातिर रहे, बाकिर परदा के पीछे असली एजेंडा ‘चोरी कांड’ पर नकेल कसले रहे। योगी जी कहनीं कि पन्द्रह दिन का भीतर एह मामला के सगरी कुछ सोझा आ जाई। कहनी कि, ‘दोषी केहू होखे, बख्शल ना जाई।। दूध के दूध आ पानी के पानी क दीहल जाई। “अयोध्या के बदनाम करे वाला लोगन के मंसूबा पूरा ना होखी।”
आ योगी जी के ई चेतावनी विपक्षे भर खातिर ना हो के ट्रस्ट का भीतर छुपल “विभीषण” लोगो खातिर रहल। एह दौरा से जवन सबले बड़का संकेत रहल ऊ रहल ट्रस्ट के महासचिव संपत राय के एह आयोजन से दूर रहे के निर्देश। जवन चंपत राय हर वीआईपी (VIP) दौरा में साया नियन साथ रहत रहलें, ऊ अबकी सीएम के मंच से गायब रहलन। ई ट्रस्ट के साख पर बहुत बड़ चोट मानल जा सकेला।
ट्रस्ट के भूमिका में बदलाव के आहट
सुने में आवत बा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) आ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़ा रुख का बाद अब ट्रस्ट के मैनेजमेंट में बड़ बदलाव होखे जा रहल बा। अब नोटन के गिनती आ दान के प्रबंधन सीधे बैंकन के मुख्य अधिकारियन आ सरकारी ट्रेजरी के हाथ में सउँपे के तइयारी चल रहल बा ताकि ट्रस्ट के लोग के दखल कम कइल जा सके।
योगी जी के दौरा के बाद ई संभावना एकदम पक्का लउकत बा कि मन्दिर के “अर्थ-व्यवस्था” (Finance Management) अब ट्रस्ट के हाथ से निकाल के सरकारी पहरा में डाल दीहल जाई। दान पेटी, काउंटिंग रूम आ लॉकर के चाभी अब ट्रस्ट के निजी कर्मचारी भा ‘स्वयंसेवक’ लोग के हाथ में ना, बलुक सरकारी ट्रेजरी आ बैंक अधिकारियन के सीधा कंट्रोल में जा सकेला। सरकार ट्रस्ट के पुनर्गठन (Reshuffle) में भलहीं देर करे बाकिर ‘ऑडिट सिस्टम’ में सरकारी अधिकारी के स्थायी नियुक्ति कर सकेले।
आगे का होखे वाला बा?
संभावना बा कि कुछ अउर बड़ गिरफ्तारी हो सकेला। लवकुश मिश्रा भा टिन्नू यादवे ना, बलुक सुरक्षा एजेंसियनो के कुछ बड़ अधिकारी एह मामिला में फँस सकेलें अगर सीसीटीवी (CCTV) डिलीट करे में उनुकर शामिल रहला के प्रमाण मिल जाव। अगर कुछ बड़हन गिरफ्तारी ना भइल त अखिलेश यादव आ विपक्ष एकरा के ‘लिपापोती’ बता के अउरी बड़ आंदोलन खड़ा करे में लाग जइहें।


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