कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, अक्सर रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा.
शायद शायर इकबाल के लिखल ह ई लाइन बाकिर आजु जवन लिखे जात बानी तवना ला बहुते मौजू लागल एहसे सोचनी की एही से शुरुआत कइल जाव. दस साल पहिले जब भोजपुरी में पहिलका वेबसाइट शुरू कइले रहीं त ओह घरी इरादा ना रहुवे कि एह में फिलिम भा गीतो...
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