Category: मनोरंजन

लोक कवि अब गाते नहीं – १८

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) सतरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़त रहलीं मीनू का बारे में. कि कइसे ओकरा गवनई का स्टाइल में लोग आपन आपा भुला जाव. अब ओहसे आगा पढ़ीं….. एक बेर त अजबे हो गइल. कुछ...

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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, अक्सर रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा.

शायद शायर इकबाल के लिखल ह ई लाइन बाकिर आजु जवन लिखे जात बानी तवना ला बहुते मौजू लागल एहसे सोचनी की एही से शुरुआत कइल जाव. दस साल पहिले जब भोजपुरी में पहिलका वेबसाइट शुरू कइले रहीं त ओह घरी इरादा ना रहुवे कि एह में फिलिम भा गीतो...

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