श्रेणी: सतमेझरा

चाय के महातम

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कहले रामचेला से कि गाय आ चाय में का फरक बा. फरक तऽ ना बुझाइल बाकी बुड़बक अस मुंह बा के लगले तिकवे एने ओने. फेर सांस ले के कहले कि हमरा तऽ मालूम नइखे लेकि बतकुच्चन वाला बाबू ओम परकास जी से पूछ...

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तरह – तरह के दंगल

– जयंती पांडेय हमरा देश में तरह – तरह के दंगल होला. कहीं लईकन के त कहीं साढ़न के आ कहीं पहलवानन के. लेकिन अबले केहु अनशन के दंगल ना सुनले होखी. लेकिन अपना देश में ई होला. एकर जे पैदाइश के पता लगावे केहु चली तऽ चलत...

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आजु काल्हु बेईमान लोग बड़ा परसान बा

– जयंती पांडेय बेचारा बेईमान लोग बड़ा परसान बा रामचेला. ससुरा ईमानदार लोग ऊ लोग के बड़ा परसान करऽ ता. केहु धरना दे ताऽ, केहु प्रदर्शन करऽ ता आ केहु तऽ अनशन पर बईठ जा ताऽ. बईमान लोग परसान हो गईल तऽ एगो मदारी पासवान के...

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शिक्षा त अब धंधा बनल जा ता

– जयंती पांडेय जान जा भाई रामचेला, अब त शिक्षा जइसन पुण्य कामो धंधा बनत जा ता. जब से सेठ साहूकार लोग के ई बुझाइल कि पढ़ा के बड़हन आदमी बनावे के सपना बेचल जा सकेला तबसे ऊ लोग शिक्षा में हाथ गोड़ चलावे लागल लोग. पहिले सेठ लोग...

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भ्रष्टाचार माने मलाई मारे के परमानेंट सोर्स

– जयंती पांडेय आजु करप्शन के नांव पर उहे लोग हो-हल्ला मचा रहल बा, जेकरा करप्ट होखे के मौका ना मिलल. जसहीं मौका मिली, ऊ आपन ओठ सी लिहें. ई रीति जमाना से स चलि आ रहल बिया. लोग भ्रष्टाचार के विरोध करत समय ई ताक में लागल रहे...

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