Category: सतमेझरा

भउजी हो : अलकायदा बनाम आलाकमान

भउजी हो ! का बबुआ ? सुनत बानी कि मनमोहन सिंह आ गिलानी में एगो बात एके लेखा बा. का बबुआ ? गिलानी के अपना देश में रहे वाला ओसामा का बारे में पता ना रहे आ मनमोहन के अपना मंत्री ए॰राजा का बारे में. ई झूठ बा बबुआ. काहे भउजी ? मनमोहन...

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कहाँ गइल उ दिन

– जयंती पांडेय घर के बूढ़ पुरनिया कहेलन कि सब दिन होत न एक समाना. तुलसिओ बाबा एतना बड़ रामचरितमानस लिख के समुझवले बाड़न, “होइहें वही जो राम रचि राखा, को करि तरक बढ़ावहीं शाखा.” सचहूँ, समय बहुते बलवान होला. एकर...

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ई जग ह भ्रष्टाचारी !

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद लमहर सांस घींच के कहले, हो राम चेला ई कुटिल, कपटी जुग में अबहियों कातना लोग भेंटाता ई कहे वाला कि “हम आजु ले कवनों भ्रष्टाचार नइखी कइले. नाजायज पइसा के हाथ से छुअल का हम त ओकरा इयोर तकबो...

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भ्रष्टाचार एनहु-ओनहुं चारू इयोर

– जयंती पांडेय सियावर बाबू के मुँह पर बड़ा दिन का बाद हँसी लउकल. बाबा लस्टमानंद से ना खेपाइल. सियावर बाबू सरकारी अफसर हउवन. सरकारी कर्मचारी अउर आफिसन के बारे में सब कुछ जाने ले. एही से जब ऊ भेंटास त मुँह माहुर अस कइले रहस....

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का हो गइल ई देस के भगवान !

– जयंती पांडेय एकदिन एगो नेताजी अपने दुलरुआ बेटा से पूछले – बाबू रे, तें आगे जा के का बने के चाहऽतारऽ ? माने कि जिनिगी में आगे जा के का करे के इरादा बा ? उनुकर बेटा टप दे कहलसि – बाबूजी, हम त आगा चल के नेता...

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