श्रेणी: सतमेझरा

महँगी बढ़े में सरकार के कवन दोष

– जयंती पांडेय महंगी के बढ़े में सरकार के कवनो दोष नइखे. महंगी के काम हऽ बढ़ल. अगर ऊ ना बढ़ी तऽ केहु ओकरा ना चीन्ही ना पूछी. गांव शहर में रहे वाला हर बेकती आपन एगो पहचान राखेला. महंगी भी इहे रास्ता पर चलेले. महंगी लोगन के...

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अण्णा के मौन व्रत

– जयंती पांडेय अण्णा मौन व्रत ले लिहले बाड़े. एक तरह से दमी साध ले ले बाड़े. काहे कि उन कर संघतिया लोग अलटाय बलाय बोलऽता लोग ओह से कहीं ऊ ना फंस जास. ना बोलिहें ना कौनो बिबाद होई. ई सब देखि के सुनि के बेचैन रामचेला बाबा...

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छब्बीस रुपिया में अमीर हो गइले लस्टमानंद

– जयंती पांडेय जबसे योजना आयोग के मोंटेक भाई ई कहले कि हमरा गांव के लोग 26 रुपिया में अमीर हो जाई तबसे बाबा लस्टमानंद सीना फुला के घूमत रहले लेकिन ई पूजा में जब बजार करे गइले तऽ बुझाइल कि ई तऽ कुछऊ ना हऽ. काहे कि बजार में...

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कहो फलाने अब का होई

– अशोक मिश्र सबेरे मार्निंग वॉक करे निकलनी त सोचली कि उस्ताद मुजरिम से मिल लिहल जाव. से वॉक से लवटति घरी उनुका ‘गरीबखाना’ पर पहुंच गइनी. हमरा के देखते मुजरिम खुश हो गइलन आ कहले, ‘आवऽ..आवऽ..बड़ा मौका पर आइल बाड़ऽ. तोहरा के...

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नेता बने के सोचले छोड़ दिहले रामचेला

– जयंती पांडेय जबसे तरह तरह के घोटाला के केस में नेता लोग दनादन जेल जाये लागल तबसे रामचेला बड़ा मायूस हो गइले. मुँह सड़ल आम अस बना लिहले आ चेहरा ओल अस लटका लिहले. बाबा लस्टमानंद के बड़ा माया लागल. लगे जा के पूछले, का हो...

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