कविता लिखे के लकम
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी अनेकता मे एकता क उद्घोष करे वाला हमन के महान देश इहाँ क रहनिहार हर नागरिक के हऽ; बाकिर अइसनो ना कि देश के हेठे दबाइ के सबकर अपने आजादी परमुख हो जाय. पहिले राजा जवन मरजी होखे करे बदे सुतंत्र आ निरकुश...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी बहुत पहिले एक बेर क्रिकेट देखत खा, भारत के ‘माही’ मिस्टर धोनी का उड़त छक्का के कमेन्टरी वाला ‘हेलीकाप्टर शाट ‘ का कहलस, ओके नकलियावे क फैशन चल निकलल. नीचे से झटके मे़ ऊपर उठावे...
Read More– जयंती पांडेय पसेना से नहाइल रामचेला हाँफत हाँफत बाबा लस्टमानंद के लगे चहुँपले. सस्टांग दंडवर कइके आशीर्वाद लिहला के बाद रामचेला कहलन, गुरू आजकाल्हु गउवों में बदलाव के बयार बड़ा तेजी से बहऽता.. लस्टमानंद पुछलन, काहे? का...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी बुढ़ापा आदमी के अवसान का पहिले क आखिरी पड़ाव (लास्ट स्टेज) ह. शरीर के कमजोरी आ अक्षमता त बढ़िये जाला, ऊपर से परिवार आ समाज के उपेक्षा आ अपनन के अमानवी तिरस्कार बूढ़-ठेल अदिमी के भितरियो से तूरि देला....
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