ल बहुरिया हर-फार, मंहगू चललन गंगा पार
– बिनोद सिंह गहरवार भारत के असहीं ना अनेकता में एकता के देश कहल जाला. एकर खिलकत देखे के होखे...
Read More– बिनोद सिंह गहरवार भारत के असहीं ना अनेकता में एकता के देश कहल जाला. एकर खिलकत देखे के होखे...
Read More– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मनबोध मास्टर दुखी मन से कहलें – असों होली ना मनाइब. मस्टराइन पूछली- काहें? ऊ कहलें – सूर्पनखा की नाक की चलते. बात सही बा. जहां-जहां गड़बड़ बा, बूझीं सूर्पनखा के नाक फंसल बा. हम्मन क...
Read More– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....
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