टैग: व्यंग

नारायण… नारायण..

– ‍ नीमन सिंह एक बेर के बात ह, नारद मुनि कहीं से गुजरत रहनी. ओही रास्ता में उनुका एगो आदमी मिलल, उ आदमी कुछ जियादही भोला–भाला, माने कि कुछ–कुछ मुरख जइसन, सोझबउक रहे, अउर ओहपर से करईला आउर नीम चढ़ल वाली बात रहे कि उ तनी कम...

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शिक्षा के गारंटी-जय हो! जय हो!!

– जयंती पांडेय रामनिहोरा. ऊ गांव -जवार के बड़ा पुरान नेता हवें. कौ हाली तऽ परधानी जीत भइल बाड़े. एक दिन भिनसहरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पर अइले. बाबा बैलन के सानी पानी दे के गोबर- गोथार करत रहले. नेताजी दूरे से पुकरले, का...

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काहे लिहनी धरती पर अवतार

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” छोट रहनी तS कई बेर केहू-केहू कहि देत रहल कि ए बाबू अवतारी हउअS का? एकदिन रहाइल ना अउरी हम पूरा गाँव-गिराँव, हित-नात सबके बोलवनि अउरी कहनी की रउआँ सभे जानल चाहत बानी न की हम अवतारी हईं की का...

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फ्यूचर बहुत ब्राइट बा, चाचा!!

– दिवाकर मणि रामलुभाया चाचा, गोड़ लागिले. खुश रहऽ ए गुणगोबर. कहऽ का हाल-चाल बा? आजुकाल्हि त ना देखाई देत बाड़ऽ ना तहरे बारे में कुछु सुनाते बा, अईसन काहे हो? अउर तहरा चेहरा प ई खुशी टपक रहल बा, एकर रज का बाटे? बात-वात कुछो...

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