भउजी हो !
भउजी हो ! – कइसन भउजी, केकर भउजी ? बाप हो, आजु त अगिया बैताल बन गइल बाड़ू. माफ क द. – बुझा गइल आपन गलती ? हँ. बाकिर जवन भइल तवन मजबूरी में. फगुआ में ससुरारी चल गइल रहीं आ ओहिजा नेटवर्के ना रहुवे. -ई बहानेबाजी चलेवाली...
Read More– जयंती पांडेय ओह दिन गांव के बूढ़ नथुनी बाबा के देहांत हो गइल. इंडिया आ पाकिस्तान के क्रिकेट मैच रहे ओह दिन. ऊ का दो बीस-बीसा (20-20) कहाला, उहे मैचवा रहे. मुअले सांझ के. आ गांव के नौजवान दल गायब. खाली बूढ़ लोग ओहिजा आइल....
Read More– जयंती पांडेय पाकिस्तान आ भारत के प्रधानमंत्री लोग बतियावता कि झगरा मेटा लिहल जाउ लेकिन झगरा मेटी का? कबहुओं ना. ई झगरा ओइसने बा जइसन खदेरन आ मनरखन के झगड़ा. ई झगड़ा के चर्चा गांव भर में रहे. दूनो जाना पड़ोसी आ दूनो में...
Read Moreभउजी हो! का बबुआ ? हई उन्नाव में सरकार सोना खातिर खोदाई काहे करवावत बिया? हम त रउरा के अतना बुड़बक ना बूझत रहीं. ई का? हम तोहरा से सवाल पुछनी त तू हमरा के बूड़बक बतावे लगलू। त रउरे बताईं उन्नाव कहाँ बा? कानपुर का लगे. आ कानपुर में...
Read Moreआजु विजयादशमी ह आ हमार प्रिय मित्र डॉ. विजय प्रकाश एह घरी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहल बाड़े. मन भरल रहल हा. बाकिर एगो पुरान डायरी पलटत खा उनकर कुछ एसएमएस मिलल बा. मन फेरु चुलबुल हो उटल. फेरु ऊहे मिजाज,ऊहे अंदाज. 02.10.2006...
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