आखिर मिल ही गयी मंजिल कला को – ओम प्रकाशसिंह यादव
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कहते हैं कि कला सीखी नहीं जाती,कला सिखाई नहीं जाती बल्कि कुदरती देन है,जो कुदरत कलाकार को वरदान स्वरुप देता है. और शायद इसी वजह से देर से ही सही कला को मंजिल मिल ही जाती है. जी हाँ, बहुमुखी प्रतिभा के धनी बिरहा सम्राट ओम प्रकाशसिंह यादव को आखिर मंजिल मिल ही गयी और बन गए वो गायक से नायक फिल्म बूटन में.

ओम प्रकाशसिंह यादव बचपन से ही बहुमुखी कला के धनी होने की वजह से गायकी में अपना लोहा मनवाने में कामयाब रहे तथा बिरहा सम्राट की उपाधि से नवाजे गए. और अपनी अभिनय की कला को खुद के गए हुए गीतों के वीडियो अल्बम तक ही सीमित रखा था तथा तलाश में थे एक अच्छे मौके की . वैसे उनके द्वारा अभिनीत व गाये हुए गीतों अल्बम काफी लोकप्रिय भी रहे. जब टी.सीरीज कंपनी में उनकी मुलाकात अनुभवी निर्देशक एवं सिनेमैटोग्राफर एस.कुमार से हुई तो उन्होंने बड़े परदे पर अभिनय कारने की इच्छा जताई. इसी दौरान इनकी मुलाक़ात सुभाष पासीजी से हुई और निखिल इंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्मित फिल्म बूटन में बतौर हीरो अनुबंध कर लिए गए.

बतौर बिरहा सम्राट ओम प्रकाशसिंह यादव का कहना है की उनकी दिली इच्छा थी एक ऐसी फिल्म में काम करू जिसे मैं भी पूरे परिवार के साथ देख सकू, निर्मात्री रीना एस. पासी एवं लेखक निर्देशक व सिनेमैटोग्राफर एस. कुमार ने आपसी राय-मशविरा के साथ वैसी ही फिल्म का निर्माण किया है जिसे बगैर देखे अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. पहिला ट्रायल शो देखने के बाद समीक्षकों का भी मानना है कि फिल्म “बूटन”वाकई मील का पत्थर साबित होगी.

उनकी आने वाली अन्य कई फिल्में हैं लेकिन “बूटन” के बाद “झारेलिया के गाँव मे जल्द ही प्रदर्शित होगी.


(स्रोत – रामचंद्र कुंदन)

1 Comment

  1. Ramchadra Yadav

    Bhojpuri Cinema ka fir aa rahaa hai sunhra daur….

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