टैलेंट के साथ विनम्रता नहीं छोड़नी चाहिए : मनोज तिवारी
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– शशिकांत सिंह

Manoj Tiwariकिसी भी क्षेत्र में आपार संभावनाएं हैं सिर्फ आपके भीतर प्रतिभा होनी चाहिए. प्रतिभावान को एक न एक दिन जगह मिल ही जाती है. सबके पीछे चलने वाले व्यक्ति के पीछे दुनिया चलने लगती है. इन्हीं लोगों में से एक हैं प्रसिद्ध भोजपुरी मेगा स्टार और लोकप्रिय गायक मनोज तिवारी. बिहार के कैमूर जिले के गांव अतरवलिया में पैदा हुए मनोज तिवारी आज उस मुकाम पर हैं जिसे देखने के लिए लोग तरसते हैं. मनोज तिवारी ने बातचीत में मुकाम हासिल करने से लेकर राजनीति व अन्य कई विषयों पर अपने विचार शेयर किए. प्रस्तुत है उसी बातचीत के मुख्य अंश :

गांव से जुड़े होने के कारण कितना मुश्किल था मुकाम हासिल करना?

देखिए, पहला गाना गाने में चार साल लग गए. स्टूडियो से भगा दिया जाता था. गाना गाने के बाद कह दिया जाता था, बेकार है. बहुत बेइज्जती महसूस होती थी फिर लगा रहता था. अंतत: कामयाबी हासिल हुई. मैंने अपने संघर्ष व कामयाबी से यही अनुभव किया है कि एक कलाकार के पास टैलेंट के साथ ही विनम्रता भी होनी चाहिए.

आपको लगता है भोजपुरी फिल्मों का बढ़िया भविष्य है?

इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. अभी 10 प्रतिशत भी काम नहीं हुआ है. हिंदी फिल्मों के कलाकार भोजपुरी फिल्मों में अभिनय करने आ रहे हैं. भोजपुरी गानों के टैलेंट शो आयोजित होने लगे हैं. आज यदि उनकी पहचान है तो भोजपुरी अभिनेता व गायक के रूप में. जल्द ही ‘दयावान’ एवं ‘एलान’ नामक भोजपुरी फिल्में आने वाली हैं.

हिन्दी फिल्मों की ओर रूख करने का इरादा नहीं बनाया?

मैं जमीन से जुड़ा आदमी हूं. ठेठ भाषा में अधिक गाता हूं. फिलहाल ‘एसटीएफ’ एवं ‘हमीद’ नामक हिंदी फिल्में कर रहा हूं. वैसे विशेष झुकाव भोजपुरी फिल्मों के प्रति ही है. इस भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल कराने के लिए लगातार प्रयासरत हूं.

बिहार सरकार फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही?

मुंबई में राज ठाकरे मामले के बाद से बिहार सरकार गंभीर है. राजगीर में फिल्म सिटी विकसित करने की बात चल रही है. इस दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कर रहे हैं. फिल्म सिटी विकसित होने के बाद प्रतिभाएं तेजी से सामने आएंगी.

ऐसा नहीं लगता आपको कि राजनीति में आकर आपने गलत किया?

हां, राजनीति में आने का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा. दबाव में चुनाव मैदान में कूदा. राजनीति में आने पर अनुभव हुआ कि इसके लिए पूरा समय देना होगा न कि पार्ट टाइम. लोगों की अपेक्षाएं अधिक होती हैं. पार्ट टाइम से अपेक्षाएं पूरी नहीं की जा सकतीं.

क्या आपको लगता है कि बिहार की तस्वीर बदली है?

यदि मैं भागकर बाहर गया तो इसके पीछे कारण यही था कि वहां की व्यवस्था सही नहीं थी. राजद के शासनकाल के कारण दस साल मेरा बर्बाद हुआ. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल से माहौल बदला है. मुंबई में भी बिहार के लोगों का सम्मान बढ़ा है.

क्या बाबा रामदेव व अन्ना हजारे के संगठन से विशेष जुड़ाव है?

मैं भी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्षरत हूं. दोनों जब भी इस विषय को लेकर सामने आते हैं, मैं भी मंच पर होता हूं. भ्रष्टाचार मिटना चाहिए और काला धन बाहर से देश में वापस आना चाहिए.

आप सचिन तेंदुलकर को लेकर चर्चा में रहते हैं?

मैं क्रिकेट का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. गांव में व‌र्ल्ड कप टीम का मंदिर बनाने जा रहा हूं. मंदिर में सचिन तेंदुलकर की प्रतिमा स्थापना की जाएगी.

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