नायक ना खलनायक हईं हम – कहलन समर्थ चतुर्वेदी
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सिनेमा का संसार में एगो रिवाज जस बन गइल बा कि खलनायकी करत करत अभिनेता नायक बनि जाला. एह कड़ी में सुजीत कुमार, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा आ सुशील सिंह जइसन अनेके नाम बा. अपवाद बन के सामने आइल बाड़न समर्थ चतुर्वेदी जे त्यागी ब्रदर्स के बनावल फिलिम ‘बलमा बड़ा नादान’ में नायक बन के अपना कैरियर के शुरूआत कइले रहन. उनुकर नायिका रहली ‘दिव्या (रश्मि) देसाई. ओकरे बाद समर्थ चतुर्वेदी दिव्या संग ‘गज़ब भाईल रामा’, सीमा पाण्डेय संग ‘गंगा मैया तोहे चुनरी चढईबो’ आ ‘गोधन’, गुंजन पन्त संगे ‘नचनिया एक तमाशा’ अउर सीमा मालिक संगे ‘रक्षा बंधन’ वगैरह अनेके अभिनेत्रियन आ फिलिमन के हीरो रहलन. अब उहे समर्थ चतुर्वेदी अपना दुसरका पारी में बतौर खलनायक शुरूआत कइले बाड़न.

निर्देशक शाद कुमार के सुपर हिट फ़िल्म “त्रिनेत्र” में खलनायक बनि के परदा पर कहर मचवला का बाद दोसरको निर्माता निर्देशकन के भरोसा उनुका पर बढ़ गइल आ एह साल उनुकर अनेके फिलिम बतौर खलनायक रिलीज होखे वाला बाड़ी सँ. एह फिलिमन में ‘रूपया के बोल बाला’, ‘भोजपुरिया मजदूर’, ‘तन तुलसी मन गंगा’, आ ‘हवा में उड़ता जाय लाल दुपट्टा मलमल का’ वगैरह बाड़ी सँ


(अपना न्यूज के रपट)

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