बलिया में कजरी के साँझ
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बियफे का रात बलिया के बापू भवन में सांस्कृतिक संस्था ‘पहल’ का ओर से आयोजित कजरी के साॅझ के रंगारंग कार्यक्रम में भोजपुरी के सांस्कृतिक विरासत जीयतार हो उठल. भोजपुरी लोकगीतन के संवदना आ मिठास सुने वालन के करेजा छूअत रहल आ लोग कजरी सुन सुन के मोहित होखत रहल.

कार्यक्रम के शुरूआत गायक ओम प्रकाश के गावल कजरी ‘बरिसे सावन रसधार हो, बदरिया घेरि आइल सजनी’ से भइल. सुनीता पाठक आ शैलेंद्र मिश्र के युगल गायन भइल. शैलेंद्र मिश्रके कजरी ‘धनि हो खोल ना केवरिया हम विदेसवा जइबे ना’ सुनाके कजरी के परंपरागत गायन के नमूना देखवलन त लक्की शुक्ला ‘धनि हो का जइबू विदेसवा’ आ राजीव राज ‘मधुबनवा में आइल बहार बा’ सुनाके वाहवाही लूटले. अनुभा राय के ‘कचौड़ी गली सून कइलऽ बलमू’ सुनाके बनारसी कजरी के नमूना सुनवली. कृष्ण कुमार मिट्ठू के ‘सखी संइया तो खूबे कमात हैं’ सुना के फिलिमी लोकगीतन ओर इशारा कीलन. गावे वालन में सोनू यादव, अंजनी उपाध्याय, प्रकाश भास्कर, आशुतोष यादव वगैरहो शामिल रहले. आ गवनई के जान दिहले वाराणसी के तबला वादक अतुल कुमार राय, बांसुरी वादक व्योमकेश, आ गोलू कुमार.
संचालन युवा गायक कृष्ण कुमार कीलन.

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