शब्द
– प्रो. शत्रुघ्न कुमार जानत नइखी टपके लागेला कहवा से ई शब्दन के बूंद लेके हथवा में लेखनी सोचे लागिला जब जब, बन जाला सदा कगजवा पर अक्षर उहे बूंद सादा कगजवा पर तब-तब. पढ़ एकरा केहू कही नइखे एकरा में कोई बात लिखले बाड़े ई...
Read Moreयूपी में विधानसभा के चुनाव अगिला साल होखे वाला बा बाकिर बसपा अपना उम्मीदवारन के नाम तय कर के घोषित करे के शुरु कर दिहलसि. बाकी दल त अबही एह बारे में सोचलहू नइखन. बाकी दल के डर लागेला कि अबहिये नाम तय कर दिहला पर पार्टी विरोधी...
Read Moreउमर अब्दुल्ला नइखन चाहत कि भाजपा के लोग श्रीनगर में तिरंगा फहरावसु. कहले बाड़न कि काश्मीर अबहीं शान्त बा त आग लगवला के का जरुरत बा ? साथही कहले बाड़न कि श्रीनगर में तिरंगा फहरवला से अगर कवनो अशांति भइल त ओकर जिम्मेदार तिरंगा...
Read Moreकबो कबो कानून का खामी से भुक्तभोगी अउरी भोगे के मजबूर हो जाला आ अपराधी आनन्द उठावेला. हालही में चीन के एगो अदालत एगो आदमी के एगो नवजवान का साथ समलैंगिक बलात्कार के दोष खातिर कवनो सजाय ना दे पावल काहे कि कानून का परिभाषा में...
Read Moreभिखनाठोरी से नया साल के पिकनिक मना के लवटत तीन गो इंजिनियरिंग छात्र के मोटरसाइकिल दुर्घटना ग्रस्त हो गइल रहे. ओह दुर्घटना मं दू गो सवारी के मौत त ओहि दिन हो गइल रहे. तिसरका घवाहिल अभिषेक के पटना अस्पताल में भरती करावल गइल रहे....
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