Author: Editor

कबले अइबऽ पिया

– कन्हैया पाण्डेय लरकल लरहिया बाटे, उजरल पलानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में पानी. असवों के सेंवतल नइखे चुवेले पलनिया भुरकुस नरियवा-छपुवा, ढहऽता मकनिया उपरा प्लास्टिक कइसो तनले हम बानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में...

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गीत

– रामरक्षा मिश्र विमल १ जे रोअवला के खुशिया मनाई केहू ओकरा के का समुझाई ? लोर रोकले रोकाला ना कतहीं कहीं पूड़ी आ पूआ छनाला कहीं मरघट में बदलेले बगिया कहीं पाटी में बोतल खोलाला जे जहरिये में जिनिगी के पाई केहू ओकरा के का...

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भउजी हो….

भउजी हो….. का बबुआ ? लालू आ मुलायम के शिकायत बा कि सरकार ओह लोग के तनखाह कमे काहे बढ़वलसि ह ? ओह लोग के कतनो तनखाह दे दिहल जाई कमे रही. आखिर मास्टरी करत करोड़पति देश के कई जने भइल बाड़न ? जे चपरासीओ लायक ना रहल से आजु...

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