पश्चिमी वैश्वीकरण बनाम भारतीय विश्व कुटुम्बवाद
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ पश्चिम के दू शब्द “वैश्वीकरण” आ “भूमंडलीकरण” बहुते लोकलुभावन आ मनभावन बा. एकरा बाहरी रुप,रंग आ सम्मोहक ढंग पर के नइखे रीझल. एकरा साम, दाम, काम, चाम आ भेद-विच्छेद...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ पश्चिम के दू शब्द “वैश्वीकरण” आ “भूमंडलीकरण” बहुते लोकलुभावन आ मनभावन बा. एकरा बाहरी रुप,रंग आ सम्मोहक ढंग पर के नइखे रीझल. एकरा साम, दाम, काम, चाम आ भेद-विच्छेद...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी गंगा, सरजू, सोन का पाट में फइलल खेतिहर-संस्कृति दरसल “परिवार” का नेइं पर बनल गृहस्थ संस्कृति हऽ. परिवार बना के रहे खातिर पुरुष स्त्री क गँठजोरा क के बिवाह संस्कार से बान्हल आ मर्यादित कइला...
Read More– डाॅ. अशोक द्विवेदी हमार बाबा, ढेर पढ़ुवा लोगन का बचकाना गलती आ अज्ञान पर हँसत झट से कहसु, “पढ़ लिखि भइले लखनचन पाड़ा !” पाड़ा माने मूरख; समाजिक अनुभव-ज्ञान से शून्य. आजकल तऽ लखनचंद क जमात अउर बढ़ले चलल जाता. ए...
Read Moreहे देशवासी; हमनी के आजादी के 68वां सालगिरह के पहिले वाला साँझ हम रउरा सभ के आ दुनिया भर के भारतवासी लोग के हार्दिक अभिनंदन करत बानी. हम अपना सशस्त्र सेना, अर्ध-सैनिक बल आ आंतरिक सुरक्षा बल के सदस्यनो के खास अभिनंदन करत बानी. हम...
Read Moreबहुते जोर-शोर से उठल भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता क मांग पिछला 11 अगस्त का दिने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में भोजपुरी समाज दिल्ली भारत में मारीशस के उच्चायुक्त जगदीश्वर गोवर्धन के अभिनंदन समारोह आयोजित कइलसि. एह समारोह में...
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