Category: साहित्य

आजु पहिली तारीख हऽ

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा. करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए, पते ना चलुवे. सबेरे उठते मलिकाइन चाय बना के ले अउवी अउर कहुवी की जल्दी से तइयार होके आफिस चलि जाईं....

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एगो प्रेम प्रलाप

– डॉ. कमल किशोर सिंह तनि सुनी एगो बात, नाहीं झूठ, कहीं सांच. रउआ बिना आपन जिनिगी पहाड़ लागेला. काटे धावे घर, नीक लागे ना बाहर, जगवा में सब कुछ बेकार लागेला. रतिया के बतिया सुनाई का संघतिया, दिनवो में हमरा अन्हार लागेला....

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भूत बा कहाँ

– डा॰ सुभाष राय जाड़ा जब हाड़ ठिठुरावे लागेला त सगरो गाँवन में कउड़ा के बहार आ जाले. दुवारे से थोरिक लम्मे घर भर क कूड़ा जोरि के रखि दिहल जाला अउर सूखल रहेट्ठा तोरि के ओकरे उप्पर डारि दिहल जाला. फेरू ओके बारि के पास-पड़ोस...

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गर्मी कइलस बेहाल

– नूरैन अंसारी बहत बिया सर-सर पुरवा बयरिया. धधकत बा आग, चले लू के लहरिया. घर से कहीं निकलल मोहाल भइल बा. भाई हो गर्मी से जिअरा बेहाल भइल बा. लागत बा चईत जइसे जेठ के महीना. चुअत बा माथा से तर-तर पसीना. किरपा अइसन करत बाड़ी...

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तलास

– डा॰ सुभाष राय मौसम जब साफ बा त केहू बाढ़ के खिलाफ पोस्टर लगा सकेला बिजुरी के गरिया सकेला तूफान के खिलाफ दीवाल प नारा लिखि सकेला जब हवा शीतल धूप मिट्ठ लगे त केहू करांति क कहनी सुना सकेला लेनिन आ माओ क फोटो घर के दीवाल प...

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