Tag: भोजपुरी गीत गवनई

लोक कवि अब गाते नहीं – १४

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) तेरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि कइसे लोक कवि के भतीजा एड्स के शिकार हो गइल रहुवे. रोजी रोटी कमाए परदेस गइल आदमी कइसे छन भर के आनन्द खातिर भर जिनिगी के दुख...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १३

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) बारहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं त्रिपाठी जी के चरचा आ इहो कि लोक कवि कइसे घबड़इले जब पता चलल कि उनुका भतीजा के एड्स हो गइल बा. ओकरा के तुरते बंबई भिजवा दिहले एह...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १२

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) एगरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं गाँवे से लवटि के लखनऊ चहँपलो पर लोक कवि के शानदार स्वागत भइल. सम्मान मिलला का बाद लोक कवि के भाव अउरियो बढ़ि गइल रहे आ लोक कवि के...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ११

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १०

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) नवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सावन का बरखा में राधा में मोहन के रसे रसे बरसल. फेर राधा रुपी धाना के बिआह आन गाँवे होखल, मोहन के अपना गवनई का चलते धीरे धीरे नाम...

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