किताबि आ पत्रिका के परिचय – 8
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मातृभाषाई अस्मिता बोध


“मातृभाषाई अस्मिता बोध” डॉ. जयकांत सिंह के भोजपुरी मातृभाषा चिंतन पर एगो प्रबंधात्मक पुस्तक बिया, जवना के प्रकाशन सन् 2016 में राजर्षि प्रकाशन, मुजफ्फरपुर – 842001 (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 51 रुपया बाटे.

 

ई किताब तीन भाग में बिया।

1.भूमिका

2.मातृभाषा शिक्षा के औचित्य

3.मातृभाषाई अस्मिता बोध

 

लेखक मानऽता कि “हमरो मातृभाषा भोजपुरी महान भारतवर्ष का तद्भव संस्कृति के परिचायक अति प्राचीन लोक बेवहार के भाषा ह, जेकरा पाले लोक-शिष्ट साहित्य के अकूत भंडार बा. हमहूँ अपना मातृभाषा के उत्थान-पहचान खातिर संघर्ष करत रहींले आ हर भोजपुरीभाषी अथवा प्रेमी जन के भीतर उहे भाव-लगाव पैदा करे के उतजोग में लागल रहींले. ओही भाव-मनोभाव के शब्दाभिव्यक्ति बिया ई पुस्तक मातृभाषाई अस्मिताबोध.”

(“मातृभाषाई अस्मिता बोध” से)

 

आशा ना बिश्वास कइल जा सकऽता कि एकराके पाठक वर्ग आ खास करके शोधार्थी समुदाय जरूर पसन्न करी.

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

rmishravimal@gmail.com

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