दुर्गा माई के नौ रुप 1.शैलपुत्री
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(नवरात्र के पहिला दिन शनिचर, ५ अक्टूबर २०१३)

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्|
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् |

माई दुर्गा अपना पहिला रूप में ” शैलपुत्री ” का नाम से जानल जाली. नवरात्र में पहिला दिने माई के एही रूप के पूजा होला. दुर्गाजी के नव रूपन में प्रथम शैलपुत्री दुर्गा के महिमा अनन्त बा. पर्वतराज हिमालय का बेटी के रूप में पैदा भइला का कारन इहाँ के नाम शैलपुत्री पड़ल. पूर्वजन्म में इहाँ का प्रजापति दक्ष का घर में जन्म लेले रहलीं. तब माई के नाम “सती” रहे. इहाँ के बियाह भगवान शंकर जी से भइल. अपना पिता के द्वारा पति के अपमान भइला का दुख से माई सती योग अग्नि से अपना ओह रूप के जला के भस्म क दिहलीं. ओकरा बाद माई शैलपुत्री का रूप में शरीर धारन कइलीं. पूर्वजन्म के समान एहू जन्म में माई शैलपुत्री दुर्गा के बियाह भगवान शंकरे जी से भइल. इहाँ का बैल पर सवार बानी. इहाँ के दहिना हाथ में त्रिशूल आ बाएँ हाथ में कमल के फूल शोभेला. नवदुर्गा में पहिल माई शैलपुत्री दुर्गाजी के जय हो.


(चित्र आ विवरण डा॰रामरक्षा मिश्र का सौजन्य से)
(पहिले से प्रकाशित रहल, तिबारा प्रकाशित)

1 Comment

  1. NEEMAN SINGH

    जय हो मईया की

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