सीख भरल कविता
– अशोक कुमार तिवारी (एक) बैर बेलि जे उपजल भाई-भाई में, जइहैं दूनो जने जरुरे खाई में ।...
Read More– अशोक कुमार तिवारी (एक) बैर बेलि जे उपजल भाई-भाई में, जइहैं दूनो जने जरुरे खाई में ।...
Read More– हीरालाल ‘हीरा’ सुर साधीं तऽ लय बिगड़े, बे-ताल के बनल तराना बा। जिनिगी गावल बहुत कठिन बा,...
Read Moreभउजी हो ! आँय ! बबुआ ? रउआ आ गइनी ? रउआ त बराते गइल रहनी ? बराते थोड़े गइल रहुवीं ? अबहीं त बरात...
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