श्रेणी: सरोकार

बजलऽ ए शंख बाकिर बाबा जी के पदा के (बतकुच्चन – १११)

तीन गो कहाउत आ तीन गो चोर के कहानी. सोचत बानी कि पहिले कहनिए कह सुनाईं छोट क के. एगो गाँव में चोरी भइल, तीन गो चोर पकड़इले. राजा के जमाना रहे राजा का दरबार में पेशी भइल. राजा तीनो के बारे में जानकारी लिहलें. फेर पहिलका से कहलें,...

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बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही (बतकुच्चन – ११०)

बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही. आजु जब बतकुच्चन करे बइठल बानी त सामने टीवी पर अइसने कुछ बहस चलत बा. पंच त पंच महापंच के बात अनठिया देबे पर लागल बा सभे. आ हमहु एह पर बेसी कुछ ना कहब काहे कि कहल गइल बा कि जर जोरू जमीन...

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बतकुच्चन – १०९

हुकहुकी चलत बा. केकर? अब का कहल जाव कि केकर. ओने सरबजीत के त एने सरकार के. कब साँस रुक जाई केहु नइखे जानत. आ साँच कहीं त साँस त कब के रुक गइल बा. बस वेंटिलेटर के सहारे साँस चलत बा. केहु के वेंटिलेटर मशीन से, त केहु के बाहर से...

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बतकुच्चन – १०८

पान सड़ल काहे, घोड़ा अड़ल काहे, रोटी जरल काहे, लईका बिगड़ल काहे ? एह चारो सवाल के एके जवाब कि, फेरल ना गइल. पान के पत्ता के बारबार पलटत रहे के पड़ेला, ना पलटब त सड़े लागी. घोड़ा के बीच बीच में दउड़ावत रहे के पड़ेला, आदत छूट जाई त बीचे...

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मुंबई से बिहारी-मराठी समभाव के आवाज उठल

– आशुतोष कुमार सिंह मुम्बई में बिहार आ बिहारियन के चरचा अइले दिन होखत रहेला. बिहारी समुदाय का खिलाफ भाषणबाजी आ बयानबाजीओ होत रहेला. बाकिर पिछला 16 अप्रैल के षण्मुखानंद हॉल में बिहार दिवस के मौका पर जवन देखे सुने के मिलल उ...

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